कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग के हलफनामे को बताया गलत, कहा-जांच होनी चाहिए

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर . विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भारत के चुनाव आयोग द्वारा Supreme Court में दाखिल किए गए हलफनामे को कांग्रेस के नेताओं ने गलत बताते हुए जांच की मांग की है. इसके साथ ही नेताओं ने कहा कि विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब भी नहीं दिए गए.

भारत के चुनाव आयोग ने Supreme Court में एक हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए थे.

कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने से बातचीत में कहा, “Supreme Court में इंडी गठबंधन ने मांग की थी कि इससे जुड़े सभी रिकॉर्ड पेश किए जाएं. लेकिन पब्लिक डोमेन में जो जानकारी है, उसके मुताबिक Supreme Court में ऐसा कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया है. हमें Supreme Court पर पूरा भरोसा है. हमें उम्मीद है कि सभी रिकॉर्ड पेश किए जाएंगे और चुनाव आयुक्तों की ओर से दिए गए ‘डिसेंट नोट्स’ (असहमति जताने वाले नोट) की भी जांच की जाएगी.”

सांसद ने कहा, “रिकॉर्ड की जांच के बाद ही यह तय किया जा सकता है कि क्या सर्वसम्मति से कोई फैसला लिया गया था. सिर्फ बयान देना काफी नहीं है, असल में क्या हुआ, इसकी जांच होनी चाहिए. लेकिन फॉर्म 6 के मामले में गड़बड़ियां बिल्कुल साफ हैं, यह भी साफ है कि उन्होंने फॉर्म नंबर 6 को कैसे बदल दिया. पब्लिक रिकॉर्ड में यह भी साफ तौर पर दर्ज है कि उन्होंने फॉर्म नंबर 6 को लेकर अपना रुख पूरी तरह से कैसे बदल लिया.”

कांग्रेस सांसद करमवीर सिंह बौद्ध ने कहा, “विपक्ष, राहुल गांधी और कई अन्य नेता लगातार चुनाव आयोग की मनमानी को लेकर सवाल उठाते रहे हैं. एसआईआर के नाम पर फॉर्म में बदलाव करना, फॉर्म से छेड़छाड़ करना और लाखों-करोड़ों वोट काट देना, इन आरोपों का जवाब आपने क्यों नहीं दिया? आज जब आपने Supreme Court में हलफनामा दाखिल किया है, तो यह अच्छी बात है कि कोर्ट यह देखेगा कि आपने कितना सच और कितना झूठ पेश किया है. इसकी जांच होनी चाहिए और सच सामने आ जाएगा. आज भी जिन इलाकों में चुनाव से पहले नए नाम जोड़े गए थे, वहां एसआईआर के बहाने वोट काट दिए गए हैं. हमारे पास इसके पुख्ता सबूत हैं. जब एक ही घर से 50, 60 या 100 वोट दर्ज होने की लिखित शिकायतें दी गईं, तो कोई जवाब नहीं दिया गया. हलफनामे की जांच होनी चाहिए.”

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा Supreme Court में दिया गया हलफनामा बिल्कुल गलत है. पहले दो चुनाव आयुक्तों ने कहा था कि फैसलों पर उनकी सहमति नहीं ली गई. अब कोर्ट में ये कहना कि सर्वसम्मति से फैसले लिए गए थे, यह गलत है. चुनाव आयोग के अधिकारियों के बयान विरोधाभासी हैं.”

एनसीपी (एसपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने कहा, “भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दाखिल किया गया हलफनामा हैरान करने वाला नहीं है, क्योंकि एक समय ऐसा भी था, जब उन पर सवाल उठाए गए थे. उस समय उन्होंने कहा था कि उन्होंने फॉर्म 6 में ये बदलाव इसलिए किए, क्योंकि Supreme Court ने उन्हें ऐसा करने का निर्देश दिया था. तब भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमने कोई निर्देश नहीं दिया है. अब, इतने दिनों के बाद, वे एक ऐसा हलफनामा लेकर आए हैं, जिसमें कहा गया है कि कोई बदलाव नहीं किया गया था, बल्कि जो भी हुआ, वह सर्वसम्मति से हुआ था.”

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ओपी/एबीएम