
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर . डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) की याचिका पर Supreme Court ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने कहा है कि वह 17 नवंबर को इसी मामले में दाखिल दूसरी याचिकाओं के साथ सुनवाई करेगा.
Supreme Court ने फिलहाल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 और डीपीडीपी रूल्स 2025 पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. याचिका में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 और डीपीडीपी रूल्स, 2025 के प्रावधानों को चुनौती दी गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि ये नियम प्रेस की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार का उल्लंघन करते हैं.
याचिका में कहा गया है कि पत्रकारिता के कामों के लिए छूट नहीं होने से खोजी पत्रकारिता खतरे में पड़ जाएगी. गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा प्रभावित होगी और सहमति तथा डेटा हटाने की बेहद कठिन शर्तें थोपी जाएंगी.
याचिका में आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(जे) में हुए संशोधन को भी चुनौती दी गई है, जो सरकारी अधिकारियों से जुड़ी जानकारी तक पहुंच को सीमित करता है. साथ ही, डीपीडीपी अधिनियम के तहत जानकारी मांगने की केंद्र सरकार की व्यापक शक्तियों को भी चुनौती दी गई है.
याचिका में कई प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित करके रद्द करने की मांग की गई है. सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि नागरिकों के भी अपने अधिकार हैं. एक संतुलन बनाना जरूरी है.
डीएनपीए भारत का एक प्रमुख उद्योग संगठन है. यह देश के बड़े प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों के डिजिटल विंग्स का प्रतिनिधित्व करता है. इसकी स्थापना 2018 में हुई थी. इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल समाचार उद्योग में नैतिक मानकों, पत्रकारिता की स्वतंत्रता और डिजिटल प्रकाशकों के हितों की रक्षा करना है.
इसमें देश के करीब 17 से 21 प्रमुख मीडिया समूह शामिल हैं, जैसे दैनिक जागरण, दैनिक , द इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स, नेटवर्क18, एनडीटीवी, इंडिया टुडे समूह, अमर उजाला और एबीपी नेटवर्क आदि.
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वीकेयू/एबीएम