धुआं, जलता हुआ टॉयलेट ढक्कन और फरार आरोपी: रेलवे सुरक्षा बल ने दिव्यांगजन कोच में लगी आग की गुत्थी सुलझाई

कोलकाता, 2 जुलाई . 21 जून की दोपहर सामान्य थी. ट्रेन संख्या 53434 डाउन (बरहरवा–आजिमगंज पैसेंजर) बरहरवा स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 2 से धीरे-धीरे रवाना हुई ही थी कि कुछ ही मिनटों बाद अचानक आपातकालीन चेन खींचे जाने के कारण ट्रेन रुक गई. यात्रियों में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब यह खबर फैली कि इंजन के ठीक पीछे स्थित दिव्यांगजन कोच के शौचालय में आग लग गई है. ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ कांस्टेबल मृत्युंजय कुमार, उपनिरीक्षक लाल बहादुर माझी तथा कांस्टेबल अनिल कुमार तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े. शौचालय के भीतर उन्होंने देखा कि पश्चिमी शैली (वेस्टर्न) के कमोड के फाइबर से बने ढक्कन को फर्श पर रखकर जलाया गया था. वहां न तो कोई कागज था, न कपड़ा और न ही पेट्रोल अथवा केरोसिन जैसी किसी ज्वलनशील पदार्थ की गंध. आग लगने का कारण पूरी तरह रहस्यमय था और आरोपी फरार हो चुका था.

आरपीएफ पोस्ट बरहरवा ने अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध रेलवे अधिनियम की धारा 153 के तहत मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ की. इसके बाद आरपीएफ अधिकारियों ने अत्यंत सूक्ष्म एवं पेशेवर तरीके से बरहरवा तथा साहिबगंज स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की. यद्यपि कैमरों में संदिग्ध के ट्रेन में चढ़ने का स्पष्ट दृश्य उपलब्ध नहीं था, फिर भी टीम ने उसके कपड़ों के रंग और चलने की विशिष्ट शैली (गेट एनालिसिस) के आधार पर उसकी पहचान और निगरानी शुरू की.

पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर के मार्गदर्शन में आरपीएफ टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर जाल बिछाया. 29 जून को वही संदिग्ध साहिबगंज स्टेशन पर उसी ट्रेन में दिखाई दिया, जहां उसे गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने कोच के शौचालय में बीड़ी पी थी और उसे बुझाने के लिए प्लास्टिक के ढक्कन पर रगड़ा, जिससे ढक्कन में आग लग गई. घबराकर वह धीमी गति से चल रही ट्रेन से कूदकर फरार हो गया था. आरोपी को रेलवे न्यायिक मजिस्ट्रेट (आरजेएम), साहिबगंज के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे 24 जुलाई, 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

यह त्वरित एवं सूक्ष्म जांच रेलवे सुरक्षा बल की यात्रियों की सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है. पूर्व रेलवे के आईजी-सह-प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त अमियानंदन सिन्हा ने बरहरवा आरपीएफ टीम की सराहना करते हुए कहा कि टीम ने सीसीटीवी गेट एनालिसिस तथा जमीनी स्तर पर प्राप्त खुफिया सूचनाओं का प्रभावी उपयोग कर कुछ ही दिनों में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और यह सुनिश्चित किया कि यात्रियों तथा रेलवे संपत्ति को खतरे में डालने वाला यह लापरवाह कृत्य दंडित हो.

रेल सुरक्षा में जनसहयोग के महत्व पर बल देते हुए पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझी ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा पूर्व रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है और यात्रियों अथवा रेलवे संपत्ति को खतरे में डालने वाले किसी भी कृत्य के प्रति हमारी शून्य-सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) की नीति है. ट्रेनों के भीतर धूम्रपान करना न केवल पूर्णतः प्रतिबंधित एवं दंडनीय है, बल्कि जैसा कि इस घटना से स्पष्ट है, इसके गंभीर और खतरनाक परिणाम भी हो सकते हैं. हम सभी यात्रियों से अपील करते हैं कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें, जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार करें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि या आग से संबंधित खतरे की जानकारी तुरंत आरपीएफ अथवा ट्रेन कर्मचारी को दें.

एमएस/