
रांची, 21 जुलाई झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के परिणाम को लेकर उठे विवाद ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है. परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) ने 22 जुलाई को रांची में जेपीएससी मुख्यालय के घेराव का ऐलान किया है. इस बीच जेएलकेएम विधायक जयराम महतो ने मंगलवार को राज्यपाल से मिलकर परीक्षा प्रक्रिया की जांच और मुख्य परीक्षा स्थगित करने की मांग की है.
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा में व्यापक गड़बड़ियां हुई हैं और लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है. उन्होंने कहा कि परिणाम जारी होने के बाद अभ्यर्थियों के बीच कई सवाल उठे हैं. उनके अनुसार, अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराई गई मार्कशीट पर संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं हैं. साथ ही सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत ओएमआर शीट की प्रतियां भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं.
उन्होंने दावा किया कि आयोग की वेबसाइट पर भी कई जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं. साहू ने कहा कि इन मुद्दों के विरोध में बुधवार सुबह जयपाल सिंह स्टेडियम से हजारों युवा कार्यकर्ता जेपीएससी कार्यालय तक मार्च निकालेंगे और उसका घेराव करेंगे. उन्होंने राज्य के युवाओं और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों से आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और युवाओं के भविष्य की है.
उधर, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के विधायक जयराम महतो ने मंगलवार को राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात कर मुख्य परीक्षा तत्काल स्थगित करने की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की विश्वसनीयता पर पहले से सवाल हैं और परीक्षा परिणाम आधी रात को जारी किए जाने से संदेह और गहरा हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा.
भाजपा के आंदोलन को भी उन्होंने नैतिक समर्थन देने की घोषणा की. इससे पहले परीक्षा परिणाम में कथित गड़बड़ियों के विरोध में अभ्यर्थी और विभिन्न छात्र संगठन भी जेपीएससी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर चुके हैं. प्रदर्शनकारियों ने परिणाम रद्द करने, पूरी चयन प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने, कट-ऑफ सार्वजनिक करने और कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. आयोग की ओर से अब तक इन आरोपों पर प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
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एसएनसी/पीएम