
जम्मू, 3 अगस्त . जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में बांग्लादेश के 21 संदिग्ध नागरिकों को हिरासत में लिया गया है.
इस ग्रुप में तीन महिलाएं और सात बच्चे भी शामिल थे. इन्हें रामबन जिले में तब हिरासत में लिया गया, जब वे दो गाड़ियों में जम्मू से कश्मीर की ओर जा रहे थे.
पुलिस अधिकारी ने बताया कि रविवार को रामबन में एक चेकपॉइंट पर रूटीन चेकिंग के लिए इन गाड़ियों को रोका गया. जांच-पड़ताल के दौरान, ये लोग देश में अपने कानूनी प्रवास को साबित करने के लिए कोई वैध पहचान पत्र या यात्रा दस्तावेज नहीं दिखा पाए. मौके पर शुरुआती पूछताछ के बाद, सभी 21 लोगों को हिरासत में ले लिया गया और आगे की पूछताछ के लिए पुलिस सेंटर भेज दिया गया.
अधिकारी ने आगे बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों के बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासी होने का शक है, जो असम के रास्ते भारत में घुसे और ट्रेन से जम्मू पहुंचे.
अधिकारियों के मुताबिक, यह ग्रुप काम की तलाश में घाटी (कश्मीर) जा रहा था.
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या अवैध प्रवासियों की आवाजाही में मदद करने वाले किसी स्थानीय या अंतर-राज्यीय नेटवर्क से इस ग्रुप को मदद मिल रही थी. एक अधिकारी ने कहा कि मामले की और जांच की जा रही है और जांच के नतीजों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
बांग्लादेश से भारत में होने वाला अवैध प्रवास दक्षिण एशिया के सबसे ज्यादा राजनीतिक रूप से संवेदनशील, आबादी के लिहाज से जटिल और कानूनी तौर पर विवादित मुद्दों में से एक है.
हालांकि, अभी भारत में रह रहे बिना कागजात वाले बांग्लादेशी प्रवासियों की सही संख्या को लेकर कोई आधिकारिक सहमति नहीं है, लेकिन सरकार के पुराने अनुमानों के मुताबिक यह संख्या लाखों में है.
स्थानीय स्तर पर हुए राजनीतिक बदलावों के बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया है, जिसके चलते लोगों की पहचान करने, उन्हें हिरासत में लेने और वापस भेजने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं.
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत के बाद, राज्य सरकार ने बिना कागजात वाले विदेशी नागरिकों की पहचान करने के लिए पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की.
पश्चिम बंगाल प्रशासन ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के साथ मिलकर एसआईआर पहल शुरू की, ताकि आधिकारिक वोटर लिस्ट और कल्याणकारी योजनाओं के रिकॉर्ड से बिना कागजात वाले लोगों के नाम हटाए जा सकें.
मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में सीसीटीवी निगरानी वाली हाई-सिक्योरिटी डिटेंशन सुविधाएं बनाई गई हैं. यहां अवैध रूप से घुसने के शक वाले लोगों को 30 दिनों तक रखा जा सकता है, ताकि इस दौरान उनका बायोमेट्रिक और डेमोग्राफिक डेटा इकट्ठा किया जा सके.
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एमएस/