भारत और थाईलैंड ने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने को लेकर की चर्चा

बैंकॉक, 30 जून . भारत और थाईलैंड ने मंगलवार को द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ाकर अपनी रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की. दोनों देशों के बीच हुई इस बैठक का नेतृत्व थाईलैंड के उप प्रधानमंत्री सिहासक फुआंगकेटकेओ और भारत के राजदूत पुनीत अग्रवाल ने किया.

पिछले साल अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बैंकॉक दौरे के दौरान भारत और थाईलैंड ने अपने आपसी संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाया था.

मार्च की शुरुआत में पीएम मोदी ने थाईलैंड के प्रधानमंत्री चुने जाने पर अनुतिन चर्नविराकुल को बधाई दी थी और उनके साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई थी.

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पीएम अनुतिन चर्नविराकुल के लिए बधाई संदेश में लिखा, “अनुतिन चर्नविराकुल को थाईलैंड स्राज्य के प्रधानमंत्री चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. मैं उनके साथ मिलकर काम करने का इंतजार कर रहा हूं. साथ मिलकर, हम कई तरह की भारत-थाईलैंड रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करेंगे. हमारे संबंध साझा सभ्यता की विरासत, करीबी सांस्कृतिक जुड़ाव और लोगों के बीच मजबूत संबंधों पर आधारित हैं. भारत और थाईलैंड अपने लोगों के लिए शांति, तरक्की और खुशहाली की अपनी साझा उम्मीदों में एकजुट हैं.”

बता दें, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में हुए वोट में बहुमत मिलने के बाद भूमजैथाई पार्टी के उम्मीदवार चरनवीरकुल को थाईलैंड का पीएम फिर से चुना गया.

भारत और थाईलैंड के बीच अच्छे द्विपक्षीय संबंध हैं. दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध 1947 में बने थे. दोनों देशों ने 2022 में डिप्लोमैटिक संबंधों की स्थापना की 75वीं सालगिरह मनाई.

थाईलैंड में भारतीय दूतावास के बयान के अनुसार, भारत और थाईलैंड के बीच संबंध कई तरह के हैं और इनमें व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, कनेक्टिविटी, संस्कृति और पर्यटन, शिक्षा, विज्ञान और तकनीक और लोगों के बीच आदान-प्रदान जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं. थाईलैंड की ‘एक्ट वेस्ट’ नीति भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति की पूरक है.

एक्ट ईस्ट नीति भारत की एक प्रमुख रणनीतिक और राजनयिक पहल है. इसका मुख्य उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र, विशेषकर दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना है.

केके/पीएम