संयुक्त राष्ट्र में अफगान मिशन ने पाकिस्तानी हमलों पर जताई चिंता, जवाबदेही तय करने को कहा

न्यूयॉर्क, 30 जून . संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के स्थायी मिशन ने पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में पाकिस्तानी हवाई हमलों की कड़ी निंदा की है. मिशन ने कहा कि इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित कई निर्दोष अफगान नागरिक मारे गए और घायल हुए हैं. साथ ही पाकिस्तान से अफगान क्षेत्र में सभी सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की गई है.

तालिबान के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने सोमवार को बताया था कि 28 जून की रात पाकिस्तानी सेना की ओर से किए गए हवाई हमलों में 36 नागरिकों की मौत हो गई, जबकि 163 लोग घायल हुए. उन्होंने यह भी कहा कि हमलों में तीन रिहायशी मकान पूरी तरह तबाह हो गए.

संयुक्त राष्ट्र में अफगान मिशन ने कहा कि ये हमले अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन हैं और संयुक्त राष्ट्र चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं. मिशन के अनुसार, कोई भी सुरक्षा संबंधी चिंता ऐसे सैन्य अभियान को उचित नहीं ठहरा सकती, जिसमें निर्दोष नागरिकों की जान जाए या किसी दूसरे देश की सीमाओं का उल्लंघन हो. हर परिस्थिति में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.

मिशन ने कहा कि अफगानिस्तान के लोग दशकों से युद्ध, हिंसा और अस्थिरता झेलते आ रहे हैं और आज भी उसके गंभीर परिणाम भुगत रहे हैं.

बयान में तालिबान शासन की भी आलोचना की गई. मिशन ने कहा, ” तालिबान की दमनकारी नीतियों, मानवाधिकार उल्लंघनों और अपनी जिम्मेदारियां निभाने में विफलता ने पहले ही अफगान जनता को भारी पीड़ा दी है. ऐसे में पाकिस्तान और तालिबान के बीच आतंकवाद के आरोपों और बढ़ते तनाव का खामियाजा आम अफगान नागरिकों को नहीं भुगतना चाहिए. नागरिकों की लगातार हो रही पीड़ा को सामान्य नहीं माना जा सकता.”

अफगान मिशन ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से स्थिति पर करीबी नजर रखने, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों की पुष्टि करने और अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान सुनिश्चित करने की अपील की. साथ ही भविष्य में तनाव बढ़ने से रोकने और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया.

मिशन ने कहा कि अफगानिस्तान के लोग शांति, सुरक्षा, अपनी संप्रभुता के सम्मान और आतंकवाद, हिंसा तथा भय से मुक्त जीवन के हकदार हैं.

वहीं, नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल (एनआरसी) के महासचिव जान एगेलैंड ने भी इन हमलों पर चिंता जताई. उन्होंने पाकिस्तान और तालिबान से अपने मतभेद बातचीत के जरिए सुलझाने की अपील करते हुए कहा कि नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को कभी निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए. दोनों पक्षों को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना चाहिए.

इसी तरह डिस्प्लेस्ड इंटरनेशनल ने भी पाकिस्तान की कार्रवाई की निंदा करते हुए मांग की कि वह अफगानिस्तान में ऐसे सभी हवाई हमले और सैन्य अभियान तुरंत बंद करे, जिनमें महिलाओं, बच्चों और अन्य नागरिकों की जान खतरे में पड़ती है या घरों, आजीविका और नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचता है.

संगठन ने कहा कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई से विस्थापन बढ़ सकता है, मानवीय संकट और गहरा सकता है तथा दशकों से संघर्ष झेल रहे समुदायों की स्थिति और खराब हो सकती है. उसने पाकिस्तान से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पूरी तरह पालन करने की भी अपील की.

केआर/