
नई दिल्ली, 1 जुलाई . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच हाल ही में हुई टेलीफोन बातचीत को लेकर देश की सियासत में प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है. इस बातचीत को भारत-ईरान संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज़ हुसैन ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह बातचीत भारत और ईरान के पुराने और मजबूत संबंधों को और आगे बढ़ाने वाली है. भारत हमेशा से स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता रहा है और किसी भी गुट में शामिल हुए बिना सभी देशों के साथ संतुलित संबंध रखता है. उनके अनुसार, यह संवाद दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देगा.
भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने भी इस बातचीत का समर्थन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी लगातार वैश्विक स्तर पर शांति, स्थिरता और सुरक्षा के पक्षधर रहे हैं. पीएम मोदी का मानना है कि किसी भी संकट का समाधान युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत और आपसी समझ से ही संभव है. मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में संवाद और कूटनीति की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है.
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया में चल रहे संघर्षों को समाप्त करने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं. युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और इससे सभी पक्षों को नुकसान होता है. समुद्री मार्गों में किसी भी प्रकार की बाधा न केवल विकासशील बल्कि विकसित देशों की अर्थव्यवस्था के लिए भी हानिकारक है.
अजय आलोक ने आगे कहा कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से अच्छे संबंध रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से बातचीत कर वहां की जनता की चिंता भी व्यक्त की है. वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया.
अजय आलोक ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री वैश्विक तौर पर इस युध्द को खत्म करने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत हैं. उनका स्पष्ट मानना है कि किसी भी समस्या का समाधान केवल कूटनीतिक प्रयासों से ही निकाले जा सकते है. बातचीत से हल हो सकता है. युध्द किसी चीज का समाधान नहीं है.”
वहीं जनता दल (यूनाइटेड) के एमएलसी नीरज कुमार ने भी इस बातचीत का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव पूरी दुनिया के लिए आर्थिक चुनौतियां पैदा कर रहा है. ऐसे में भारत की भूमिका और उसकी कूटनीतिक भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है. उन्होंने इसे एक सकारात्मक और राहत देने वाली पहल बताया.
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एसएके/पीएम