
नई दिल्ली, 3 जुलाई . भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बांग्लादेश की तीस्ता परियोजना, विदेशों में भारतीय मिशनों की कांसुलर सेवाओं और सिंधु जल संधि पर भारत की स्थिति स्पष्ट की.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में बांग्लादेश में विकास परियोजनाओं पर बात करते हुए कहा कि तीस्ता नदी परियोजना को लेकर भारत पहले ही बांग्लादेश को अपना रुख बता चुका है. बांग्लादेश में विकास परियोजनाओं के लिए भारत की सहायता दोनों देशों के बीच तय रोडमैप के अनुसार दी जाती है और इसकी नियमित समीक्षा होती रहती है. तीस्ता नदी परियोजना पर हमारा रुख पहले ही बांग्लादेश को बताया जा चुका है. अब इस मुद्दे से जुड़े सभी नए घटनाक्रमों को ध्यान में रखते हुए भारत आगे अपनी रणनीति तय करेगा.
सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) पर बात करते हुए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि साल 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से फिलहाल स्थगित रखा जाएगा. यह तब तक लागू नहीं होगी, जब तक पाकिस्तान भरोसेमंद और स्थायी तरीके से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह बंद नहीं कर देता. सिंधु जल संधि पर भारत का रुख पहले जैसा ही रहेगा.
भारतीय मिशनों की ओर से दी जा रही कांसुलर सेवाओं पर प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया, कुवैत और यूएई में हमारे भारतीय मिशन फिलहाल सीमित कांसुलर सेवाएं दे रहे हैं. इन देशों में हमारी कांसुलर सेवाओं में सहयोग करने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसी का काम फिलहाल रोक दिया गया है, क्योंकि यह मामला इस समय दिल्ली हाई कोर्ट में विचाराधीन है. हमें इस मामले में माननीय दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों का इंतजार है.
अफगानिस्तान में हुए हमलों को लेकर जायसवाल ने कहा कि हमने पाकिस्तान से अफगानिस्तान पर किए गए हवाई हमलों की कड़ी निंदा की है. हमने अफगानिस्तान की अखंडता और संप्रभुता के लिए अपना मजबूत समर्थन भी दोहराया है. हमारा मानवीय सहायता सहयोग जारी है. हम विकास परियोजनाएं भी चला रहे हैं, जिनसे वहां के लोगों के जीवन में सुधार हो सकता है.
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एवाई/एबीएम