
मुंबई, 3 जुलाई . महाराष्ट्र में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक अभियान शुरू किया है. सरकार ने सभी शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों को निर्देश दिया है कि वे केंद्र सरकार के एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) नियम, 2023 और Supreme Court के निर्देशों के अनुसार आवारा कुत्तों की नसबंदी और रेबीज रोधी टीकाकरण अभियान को सख्ती से लागू करें.
इसकी जानकारी उद्योग मंत्री उदय सामंत ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान दी. यह मुद्दा विधायक अर्जुन खोतकर ने उठाया था. इस दौरान अमीन पटेल, स्नेहा दुबे, नमिता मुंदड़ा और सना मलिक समेत कई विधायकों ने भी चर्चा में हिस्सा लिया.
उदय सामंत ने बताया कि राज्य में आवारा कुत्तों की संख्या काफी अधिक है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में करीब 14.8 लाख आवारा कुत्ते हैं, जिनमें से 94 हजार केवल मुंबई में हैं.
उन्होंने कहा कि इस वर्ष राज्यभर में 65 हजार आवारा कुत्तों की नसबंदी की गई है, जबकि 97,960 कुत्तों को रेबीज रोधी टीका लगाया गया है.
मंत्री ने बताया कि कुत्तों के काटने की घटनाओं में भी चिंताजनक बढ़ोतरी हुई है. अहिल्यानगर (पूर्व में अहमदनगर) जिले में जनवरी और फरवरी 2026 के दौरान कुत्तों के काटने के 7,230 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 463 अधिक हैं.
समस्या के मानवीय और प्रभावी समाधान के लिए सरकार ने कई कदम उठाने की योजना बनाई है. इसके तहत मुंबई में अगले छह महीनों के भीतर आवारा कुत्तों के लिए विशेष आश्रय गृह बनाए जाएंगे. इसके लिए राजस्व विभाग से तीन स्थानों पर जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है.
मंत्री के अनुसार, मुलुंड और मलाड में लगभग 3,000-3,000 वर्ग फुट भूमि मांगी गई है, जबकि नाहुर में 8,411 वर्ग फुट का बड़ा भूखंड चिह्नित किया गया है.
Supreme Court की सिफारिशों के अनुरूप राज्य के पांच प्रमुख नगर निगमों ने स्वतंत्र एनिमल बर्थ कंट्रोल विभाग स्थापित करने का निर्णय लिया है. ये विभाग मुंबई, पुणे, कल्याण-डोंबिवली, पिंपरी-चिंचवड़ और नासिक में बनाए जाएंगे.
अस्पताल परिसरों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी को लेकर शिकायतों पर मंत्री ने कहा कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने डॉ. आर.एन. कूपर अस्पताल परिसर से आवारा कुत्तों को हटाने के लिए विशेष टीमें तैनात की हैं. अस्पताल और उसके आसपास नियमित रूप से नसबंदी और टीकाकरण अभियान भी चलाया जा रहा है, ताकि मरीजों, उनके परिजनों और चिकित्सा कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
उदय सामंत ने बताया कि कुछ स्थानीय निकायों ने इस दिशा में अच्छे परिणाम भी हासिल किए हैं. उदाहरण के तौर पर जालना नगर निगम ने अपने क्षेत्र में एबीसी कार्यक्रम के लिए एक विशेष एजेंसी नियुक्त की थी. शुरुआती चुनौतियों के बावजूद एजेंसी ने 320 दिनों में 2,245 आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया.
उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों और स्थानीय निकायों के बीच जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने के लिए राज्य सरकार ने कई सरकारी आदेश और परिपत्र जारी किए हैं. शहरी विकास विभाग ने 20 मार्च 2025 को कार्यान्वयन संबंधी आदेश जारी किए थे, जबकि 24 नवंबर 2025 को सभी नगर निकायों को संचालन संबंधी निर्देश भेजे गए. इसी तरह ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग ने 26 और 27 नवंबर 2025 को ग्राम पंचायतों के लिए निर्देश जारी किए.
मंत्री ने बताया कि राज्यभर में इस अभियान का समन्वय बनाए रखने और Supreme Court के समक्ष एकीकृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए पशुपालन विभाग को केंद्रीय समन्वयक एजेंसी नियुक्त किया गया है. यह विभाग सभी सरकारी और स्थानीय निकायों के बीच तालमेल स्थापित करने की जिम्मेदारी निभाएगा.
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एएमटी/एबीएम