
नई दिल्ली, 6 जुलाई . Supreme Court ने सोमवार को करूर भगदड़ मामले में डीएमके की ओर से दायर अर्जी पर मंगलवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई. इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया था.
डीएमके के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी आरएस भारती की ओर से दायर अर्जी पर Supreme Court में तत्काल सुनवाई की मांग की गई.
Supreme Court इस मामले की सुनवाई मंगलवार को करने पर सहमत हो गया. अर्जी में भारती ने तमिलनाडु के मंत्री आधव अर्जुन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और टीवीके मंत्रियों को करूर भगदड़ से जुड़े सार्वजनिक बयान देने से रोकने के निर्देश देने की मांग की है, जब तक कि कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच पूरी न हो जाए.
यह अर्जी 27 सितंबर, 2025 को हुई करूर भगदड़ की घटना से जुड़ी लंबित कार्यवाही में दायर की गई है. इस घटना में टीवीके की रैली के दौरान 41 लोगों की मौत हो गई थी और 142 अन्य घायल हो गए थे.
डीएमके का आरोप है कि मंत्री आधव अर्जुन, जो इस मामले में आरोपी भी हैं, उनके सार्वजनिक बयानों और पीड़ितों के परिवारों को सरकारी लाभ देने के प्रस्ताव से कोर्ट की निगरानी में चल रही सीबीआई जांच प्रभावित हो सकती है.
2 जुलाई को आधव अर्जुन के भाषण का हवाला देते हुए अर्जी में आरोप लगाया गया कि मंत्री ने सार्वजनिक रूप से कहा कि हिसाब बराबर करना है और करूर त्रासदी के लिए पिछली डीएमके सरकार को जिम्मेदार ठहराया.
याचिका के अनुसार, मौजूदा कैबिनेट मंत्री के ऐसे बयान जांच के दौरान पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं और इससे इस न्यायालय की निगरानी में चल रही प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है.
अर्जी में आगे आरोप लगाया गया कि इस भाषण का मकसद सीबीआई जांच में बाधा डालना और जनता के बीच यह धारणा बनाना था कि डीएमके और उसका नेतृत्व राजनीतिक लाभ के लिए इस घटना के लिए जिम्मेदार थे.
इसमें उन रिपोर्टों का भी जिक्र किया गया जिनके अनुसार मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के करूर जाने की संभावना थी, ताकि भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों को सरकारी लाभ दिए जा सकें.
पीड़ित परिवारों के लिए कल्याणकारी उपायों पर कोई आपत्ति न जताते हुए याचिका में कहा गया कि ये परिवार कोर्ट की निगरानी में चल रही सीबीआई जांच में अहम गवाह हैं. ऐसे में, मामले से जुड़े लोगों का उनसे कोई भी सीधा संपर्क जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को लेकर आशंकाएं पैदा कर सकता है. Supreme Court ने पहले भगदड़ की जांच सीबीआई को सौंप दी थी.
यह कदम तब उठाया गया जब कोर्ट ने मामले को संभालने के तरीके पर चिंता जताई और मद्रास हाई कोर्ट में चल रही कार्यवाही में कुछ गड़बड़ होने की बात कही. जांच की निगरानी Supreme Court के पूर्व जज जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली एक कमेटी कर रही थी.
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डीकेएम/पीएम