
कोलकाता, 7 जुलाई . पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में नाबालिग लड़की के कथित रेप और मर्डर मामले को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा निकाले गए कैंडल लाइट मार्च पर राज्य सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने तीखा हमला बोलते हुए इसे राजनीतिक “ड्रामा” करार दिया.
पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि ममता बनर्जी जीवन भर विरोध की राजनीति करती रही हैं, लेकिन विकास के बारे में उन्हें कुछ नहीं पता. उनके शासनकाल में रेप और हत्या की हजारों घटनाएं हुईं, लेकिन कभी उन्हें पीड़ित परिवारों के बीच जाकर संवेदना व्यक्त करते नहीं देखा गया. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उन्होंने किसी पीड़ित के घर जाकर उनका दर्द बांटा या न्याय की मांग के लिए सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया.
बारुईपुर की घटना का उल्लेख करते हुए घोष ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री स्वयं पीड़ित परिवार से मिलने जाएंगे क्योंकि वह जमीनी स्तर से जुड़े हुए हैं. राज्य में राजनीतिक हिंसा की संस्कृति अभी भी जारी है और लोगों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि आने वाले छह महीनों में हालात बदलेंगे. उन्होंने कहा कि जनता ने ममता बनर्जी को विपक्ष में बैठने का अवसर दिया है और अब वह उसी भूमिका को निभा रही हैं.
घोष ने अपने बयान में पूर्व की कई घटनाओं का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि सिंगूर में तापसी मलिक के रेप और हत्या के मामले में कितने वामपंथी नेता पीड़ित परिवार के पास पहुंचे थे. इसके अलावा उन्होंने बीरभूम हिंसा का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस घटना में दस लोगों को जिंदा जला दिया गया था, लेकिन उस समय भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. एक छह वर्षीय बच्ची तमन्ना की कथित बमबारी में मौत के मामले में भी किसी बड़े नेता ने पीड़ित परिवार से मुलाकात नहीं की.
ममता बनर्जी के कालीघाट में निकाले गए कैंडल मार्च पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलीप घोष ने कहा कि यह केवल राजनीतिक दिखावा है. उनके अनुसार, यदि विपक्ष वास्तव में जनता के प्रति संवेदनशील है तो उसे हर पीड़ित के लिए समान रूप से आवाज उठानी चाहिए, न कि चुनिंदा घटनाओं पर राजनीति करनी चाहिए.
वहीं, मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने भाजपा नेता लॉकेट चटर्जी के साथ बारुईपुर रेप और मर्डर पीड़िता के परिवार से मिलने के लिए उनके घर का दौरा किया.
बारुईपुर रेप और मर्डर केस पर भाजपा नेता लॉकेट चटर्जी ने कहा, “जो भी मांग की जाएगी, वह पूरी की जाएगी.”
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा, “हम पीड़िता के चाचा के घर आए हैं, जहां उसके पिता रह रहे थे. उसकी मां भी यहीं हैं, यह उनका अपना घर है. यह बहुत दुखद है मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं हैं. हम महिला और बाल विकास विभाग की ओर से आए हैं. हम मुख्यमंत्री के प्रतिनिधियों के तौर पर आए हैं. उन्होंने ही हमें भेजा है. हम यहां भरोसा दिलाने आए हैं जैसा कि मुख्यमंत्री पहले भी कई बार कह चुके हैं कि न्याय ज़रूर मिलेगा. यह पिछली सरकारों जैसा नहीं है, जहां ऐसी घटनाएँ रोज़ होती थीं और कोई न्याय नहीं मिलता था.”
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एसएके/पीएम