31 जुलाई तक राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव कराना संभव नहीं : राज्य निर्वाचन आयोग

जयपुर, 7 जुलाई . राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि राज्य में पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) चुनाव 31 जुलाई तक कराना संभव नहीं है.

मंगलवार को सामने आई जानकारी के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग ने सोमवार को पंचायती राज विभाग को भेजे एक पत्र में कहा है कि पंचायत और नगर निकाय चुनाव कराने के लिए उसे कम से कम 90 दिनों का समय चाहिए.

आयोग ने स्पष्ट किया कि यह समयसीमा तब लागू होगी, जब राज्य सरकार अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और महिलाओं के लिए आरक्षण का निर्धारण कर दे. यह निर्धारण सरकार स्वयं या ओबीसी आयोग की सिफारिशों के आधार पर कर सकती है.

राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 मई को दिए अपने आदेश में राज्य निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई तक पंचायत और नगर निकाय चुनाव संपन्न कराने का निर्देश दिया था.

हालांकि, ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण की स्थिति अभी तक तय नहीं हो पाई है, जिससे निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव कराना मुश्किल माना जा रहा है.

हाल ही में पंचायती राज विभाग ने निर्वाचन आयोग को बताया था कि ओबीसी आयोग अपनी आरक्षण संबंधी रिपोर्ट 14 अगस्त 2026 तक सौंप सकता है.

इस रिपोर्ट के आधार पर विभाग 31 अगस्त तक सभी वर्गों के लिए आरक्षण तय करने की योजना बना रहा है. यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्वाचन आयोग चुनाव की तैयारियां शुरू कर सकेगा.

अपने जवाब में राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा है कि आरक्षण तय होने और चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद पूरी चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के लिए उसे 90 दिन की आवश्यकता होगी.

आयोग के अनुसार, पंचायत चुनावों में लगभग 50 दिन लगेंगे और पंचायतों की संख्या अधिक होने तथा व्यवस्थागत कारणों से इन्हें चार चरणों में कराया जा सकता है.

वहीं, शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों में करीब 40 दिन लगेंगे और इन्हें दो चरणों में आयोजित किए जाने की संभावना है.

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने स्थानीय निकाय चुनावों में लगातार हो रही देरी की आलोचना की.

उन्होंने से कहा, “भाजपा सरकार को हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, लोकसभा और संविधान की परवाह नहीं रह गई है. सरकार ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की सोच पर काम कर रही है, इसलिए जानबूझकर चुनावों में देरी की जा रही है. निर्वाचन आयोग बिना आंकड़ों के चुनाव नहीं करा सकता और सरकार जरूरी आंकड़े उपलब्ध नहीं करा रही है.”

एएमटी/एबीएम