अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस: पूर्व डीसीपी अभय चुडासमा बोले, व्यापक जांच और पुख्ता सबूतों से सुलझा मामला

अहमदाबाद, 7 जुलाई . वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के मामले में गुजरात हाईकोर्ट द्वारा 49 दोषियों की फांसी और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखने के बाद मामले की जांच में शामिल रहे अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के सेवानिवृत्त डीसीपी अभय चुडासमा ने कहा कि इस मामले का खुलासा व्यापक फील्डवर्क, विभिन्न एजेंसियों के समन्वित जांच अभियान और देशभर से बड़ी मात्रा में सबूत जुटाने के जरिए किया गया था.

मंगलवार को उस समय की परिस्थितियों को याद करते हुए चुडासमा ने कहा कि अहमदाबाद धमाकों से पहले जयपुर समेत देश के कई शहरों में बम धमाके हो चुके थे, लेकिन उन मामलों का खुलासा नहीं हो पाया था.

उन्होंने कहा, “जब 2008 में अहमदाबाद में धमाके हुए. उससे कुछ समय पहले जयपुर में भी बम धमाके हुए थे. उससे पहले भी देश के कई शहरों में विस्फोट हुए थे, लेकिन उन मामलों को सुलझाया नहीं जा सका था.”

उन्होंने बताया कि अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने तुरंत कई जांच टीमें बनाई और कुछ ही हफ्तों में बड़ी सफलता हासिल कर ली.

चुडासमा ने कहा, “अहमदाबाद धमाकों के बाद क्राइम ब्रांच ने बहुत मेहनत की. हमने कई टीमें बनाई और 20 दिनों के भीतर कई मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा कर दिया.”

उनके अनुसार, इस जांच से देशभर में सक्रिय इंडियन मुजाहिदीन के नेटवर्क का भी पता चला.

उन्होंने कहा, “आरोपियों से पूछताछ के दौरान देशभर में इंडियन मुजाहिदीन द्वारा किए गए कई बम धमाकों की जानकारी सामने आई. इसके लिए क्राइम ब्रांच ने लगातार चार महीने तक काम किया. हमने सभी चार्जशीट दाखिल कीं और मामले के अलग-अलग पहलुओं की जांच के लिए चार अलग-अलग जांच अधिकारियों को नियुक्त किया गया था.”

चुडासमा ने बताया कि मुकदमे और अपील की प्रक्रिया के दौरान भी जांच एजेंसियां लगातार सक्रिय रहीं और देशभर की पुलिस तथा सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखा.

उन्होंने कहा, “मामले की सुनवाई भी लंबे समय तक चली और इस दौरान लगातार प्रयास किए गए. बाद में जब मामला अपील में गया, तब भी लगातार फॉलो-अप किया गया. हमने देशभर से ऐसी कई जानकारियां जुटाईं, जो पहले आपस में जुड़ी नहीं थीं. सभी एजेंसियों के साथ सूचनाएं साझा की गईं. इससे सभी को महत्वपूर्ण जानकारी मिली और देशभर की पुलिस से भी हमें काफी सहयोग मिला.”

उन्होंने कहा, “इसी तरह पूरा मामला सुलझाया गया. इसके बाद आपने देखा होगा कि भारत में इस तरह का कोई बड़ा धमाका नहीं हुआ.” यह बताते हुए कि अभियोजन पक्ष ने अपना मामला कैसे मजबूत किया, चुडासमा ने कहा कि जांच सिर्फ दस्तावेजों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें कई तरह के भौतिक, तकनीकी और परिस्थितिजन्य सबूत शामिल थे.

उन्होंने कहा, “हमारे पास सिर्फ दस्तावेज ही नहीं, बल्कि बड़ी मात्रा में अन्य सबूत भी थे. उदाहरण के तौर पर जहां आरोपियों ने मकान किराए पर लिए थे, वहां से संबंधित सबूत जुटाए गए. उन्होंने जहां मोबाइल फोन खरीदे थे, उसके रिकॉर्ड लिए गए. जहां-जहां उन्होंने पहचान पत्र दिए थे, वहां से भी प्रमाण एकत्र किए गए. जिन होटलों में वे ठहरे थे या जिन घरों में रहे थे, वहां से भी सबूत जुटाए गए.”

उन्होंने आगे कहा, “मोबाइल फोन रिकॉर्ड से भी हमें बहुत महत्वपूर्ण जानकारी मिली. इससे यह पता लगाने में मदद मिली कि उनके संबंध देश के किन-किन हिस्सों तक फैले हुए थे.”

चुडासमा ने कहा, “इन सभी सबूतों को इकट्ठा करने के बाद जब हमने चार्जशीट दाखिल की तो मामला बेहद मजबूत बन गया.”

अभय चुडासमा उस समय अहमदाबाद क्राइम ब्रांच में वरिष्ठ अधिकारी थे और सीरियल बम धमाकों की जांच से जुड़े प्रमुख अधिकारियों में शामिल थे.

इस मामले की जांच में कई टीमों ने काम किया, विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के साथ समन्वय किया गया और हजारों दस्तावेजों तथा गवाहों की जांच की गई. इसके बाद विशेष अदालत ने फरवरी 2022 में 49 आरोपियों को दोषी ठहराया था.

मंगलवार को गुजरात हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए 38 दोषियों की मौत की सजा और 11 अन्य की उम्रकैद की सजा को कायम रखा.

अदालत ने जान गंवाने वालों के परिजनों को 10 लाख रुपए, गंभीर रूप से घायल पीड़ितों को 5 लाख रुपए और सामान्य रूप से घायल लोगों को 1 लाख रुपए मुआवजा देने का भी निर्देश दिया.

एएमटी/वीसी