
नई दिल्ली, 8 जुलाई . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बुधवार को सुभाषित शेयर किया.
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा, “धैर्य किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है. इससे कठिन चुनौतियों के बीच भी देश को एकजुट रहने के साथ ही प्रगति, समृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है.”
पीएम मोदी की ओर से एक श्लोक “चलन्ति गिरयः कामं युगान्तपवनाहताः. कृच्छ्रेऽपि न चलत्येव धीराणां निश्चलं मनः..” भी साझा किया गया.
इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि प्रलय के समय प्रचंड वायु के प्रहार से पर्वत भी विचलित होकर हिलने लगते हैं, किंतु विपत्तियों के बीच भी धैर्यवान का मन अचल और अविचलित बना रहता है.
इससे पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने सुभाषित शेयर करते हुए ‘एक्स’ पर लिखा था, “समृद्धि की शोभा विनम्रता और परोपकार में निहित है. सफलता वही सार्थक है, जिसमें लोककल्याण की भावना सर्वोपरि हो.”
पीएम ने एक श्लोक भवन्ति नम्रास्तरवः फलोद्गमैर्नवाम्बुभि-र्दूर-विलम्बिनो घनाः. अनुद्धताः सत्पुरुषाः समृद्धिभिः स्वभाव एवैष परोपकारिणाम्॥ भी साझा किया था.
इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि जिस प्रकार फल आने पर वृक्ष और जल से भरे मेघ धरती की ओर झुक जाते हैं, उसी प्रकार परोपकारी सज्जन महात्मा समृद्धि और प्रसिद्धि प्राप्त करने के बाद अहंकार नहीं करते, अपितु अपना जीवन समाज की उन्नति के लिए समर्पित कर देते हैं.
प्रधानमंत्री की ओर से 6 जुलाई को सुभाषित शेयर करते हुए पोस्ट में लिखा गया था कि भारतवर्ष की एकता, अखंडता और स्वाभिमान के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा. उनकी ओर से एक श्लोक ‘जयन्ति ते सुकृतिनो रससिद्धाः कवीश्वराः. नास्ति येषां यशःकाये जरामरणजं भयम्॥’ भी शेयर किया गया था.
इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि वे पुण्य आत्माएं और महापुरुष सदा के लिए अमर हो जाते हैं, जिन्होंने समाज के लिए उत्कृष्ट कार्य किए हैं या अपना बलिदान दिया है. उनके भौतिक शरीर भले ही नष्ट हो जाएं, लेकिन उनके यश रूपी शरीर को कभी बुढ़ापे या मृत्यु का भय नहीं होता. वे इतिहास में सदा जीवित रहते हैं.
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एसडी/एएस