
मुंबई, 9 जुलाई . ईरान-अमेरिका के बीच एक बार फिर से जारी तनातनी पर ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की ओर से उल्लंघन जारी रहे, तो इसका मजबूती से जवाब दिया जाएगा. साथ ही यह भी कहा कि अभी भी बातचीत और कूटनीति के रास्ते खुले हुए हैं.
ईरान ने चेतावनी दी है कि वह अमेरिका की बार-बार की गई कथित उल्लंघनों का मजबूत और निर्णायक जवाब देगा. ईरान का यह भी कहना है कि उसने पहले ही इस क्षेत्र में अमेरिकी हितों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए कार्रवाई की है.
गुरुवार को से बात करते हुए ईरान के भारत में महावाणिज्यदूत सईद रजा मोसयेब मोतलाघ ने कहा, “तेहरान ने शुरुआत में अमेरिका की ‘वादाखिलाफी’ और समझौतों के उल्लंघन के बावजूद संयम दिखाया था, लेकिन अब जवाब देना जरूरी हो गया है.”
उन्होंने कहा कि इस बार भी पहले की तरह हमने जवाब दिया है और हम ऐसा मजबूत और निर्णायक जवाब देंगे कि अगर खुदा ने चाहा, तो हमला करने वाला एक बार फिर अपने कदम पर पछताएगा.
महावाणिज्यदूत मोतलाघ ने कहा, “हमने हमेशा बातचीत और संवाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है. हमले से पहले, हमलों के दौरान और उसके बाद भी हमने बातचीत का रास्ता नहीं छोड़ा. दुर्भाग्य से, अमेरिका ने बार-बार अपनी वादाखिलाफी करके बातचीत की भावना को कमजोर किया है.”
उन्होंने कहा, “अगर अमेरिका अपने हमले नहीं रोकता, तो ईरान को युद्ध के मैदान में और सैन्य तरीके से जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. ईरान ने इस मुद्दे को अपनी प्राथमिकता में रखा है और क्षेत्र में अमेरिकी हितों के खिलाफ कार्रवाई भी की है.”
समुद्री सुरक्षा पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा असुरक्षित हालात को देखते हुए जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसे कुछ समुद्री इलाकों में आवाजाही पर अस्थायी रोक लगानी पड़ी है.
उन्होंने कहा, “ईरान हमेशा से क्षेत्र में शांति, स्थिरता और खुशहाली चाहता रहा है और आगे भी इसी दिशा में काम करता रहेगा.”
मोतलाघ ने बताया, “बार-बार होने वाले हमलों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को कमजोर किया है और पूरे इलाके के लोगों की शांति और स्थिरता को प्रभावित किया है. इसमें उन्होंने उन देशों का भी जिक्र किया जो फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर हैं.” उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि उनकी बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि वे अक्सर विरोधाभासी और असंगत बयान देते रहते हैं.
तनाव बढ़ने के बावजूद ईरान ने साफ किया कि वह अब भी बातचीत के लिए तैयार है. मोतलाघ से सवाल किया गया कि क्या पाकिस्तान एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है, तो उन्होंने कहा कि हमने कभी बातचीत का दरवाजा बंद नहीं किया है और न ही अब ऐसा करने का इरादा है. हम हमेशा बातचीत और चर्चा के लिए तैयार रहते हैं. हमारे पास अपनी बात रखने के लिए स्पष्ट रुख है. दुर्भाग्य से, बातचीत को कमजोर करने वाले वही लोग हैं, जिन्होंने ताकत का रास्ता चुना है. इसके बावजूद भी हमारे पास कहने के लिए बहुत कुछ है.
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एवाई/एबीएम