
ग्रेटर नोएडा, 10 जुलाई . यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने अवैध कॉलोनियों और अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जनपद अलीगढ़ के टप्पल क्षेत्र स्थित ग्राम मरोरगढ़ी और आसपास के गांवों में विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियों पर ध्वस्तीकरण अभियान चलाया.
प्राधिकरण के अनुसार इस अभियान के दौरान अब तक करीब 1.5 लाख वर्ग मीटर भूमि को अवैध कब्जे और अवैध निर्माण से मुक्त कराया गया है. इस भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 450 करोड़ रुपए बताया गया है. प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक, मरोरगढ़ी क्षेत्र में हरित वाटिका सहित कई अन्य अवैध कॉलोनियां बिना वैधानिक स्वीकृति के विकसित की जा रही थीं.
इन कॉलोनियों में सड़क, प्लॉटिंग और अन्य निर्माण कार्य भी किए जा रहे थे, जो यमुना प्राधिकरण के नियमों के विपरीत पाए गए. इसके बाद प्राधिकरण ने नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की. यह अभियान यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) राकेश कुमार सिंह के निर्देश पर चलाया गया. कार्रवाई का नेतृत्व प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी (आईएएस) शैलेंद्र कुमार सिंह ने किया.
इस दौरान उप जिलाधिकारी अभिषेक शाही, तहसीलदार मनोज कुमार सिंह, प्राधिकरण के परियोजना विभाग के अधिकारी तथा अलीगढ़ पुलिस प्रशासन की टीम भी मौके पर मौजूद रही. कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो.
प्रशासन की मौजूदगी में जेसीबी और अन्य मशीनों की सहायता से अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया और कब्जाई गई भूमि को खाली कराया गया. यमुना प्राधिकरण का कहना है कि क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग और अनधिकृत कॉलोनियों के विकास पर लगातार नजर रखी जा रही है.
ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और भविष्य में भी अवैध निर्माण तथा अतिक्रमण के खिलाफ इसी तरह सख्त अभियान जारी रहेगा. प्राधिकरण ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी भी भूखंड या कॉलोनी में निवेश करने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति की जांच अवश्य कर लें. बिना स्वीकृति विकसित की जा रही कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने से लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि अनधिकृत कॉलोनियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और अवैध कब्जों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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पीकेटी/एमएस