
पटना, 11 जुलाई . राम मंदिर चंदा चोरी मामले की जांच को लेकर कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि केवल सीबीआई जांच या एसआईटी का गठन कर देने से सच्चाई सामने नहीं आएगी. ऐसी जांच एजेंसियों पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है और मामले की निष्पक्ष जांच केवल Supreme Court के सिटिंग न्यायाधीश की निगरानी में ही संभव है.
उज्ज्वल रमण सिंह ने से बातचीत में कहा कि सीबीआई जांच हो या जांट के लिए एसआईटी बनाई जाए, ये सब मामले की लीपापोती हैं. इन जांचों से कुछ निकलने वाला नहीं है. आप देखिए कि सीबीआई ने जितनी जांचें की हैं, उनमें आज तक क्या निकला? अगर किसी को बचाना है तो मामला इन संस्थाओं को दे दीजिए, ये बचाकर आपको दे देंगी. इस मामले के जिन लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनके खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. चंपत राय बंसल, अनिल मिश्रा, गोविंद देव गिरी सहित अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए थी. यदि ऐसा होता तो लोगों का जांच प्रक्रिया पर विश्वास मजबूत होता.
उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में जनता का भरोसा न तो एसआईटी पर है और न ही सीबीआई पर. यदि मामले की जांच Supreme Court के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में निष्पक्ष तरीके से कराई जाए, तभी लोगों को उम्मीद की किरण दिखाई दे सकती है. उज्ज्वल रमण सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि संबंधित ट्रस्टियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए. उन्होंने आशंका जताई कि लोगों के बीच यह संशय है कि जांच के दौरान सबूतों के साथ छेड़छाड़ हो सकती है. लोगों के मन में यह भ्रम और संशय है कि एसआईटी सबूतों के साथ खिलवाड़ कर रही है.
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार मामले की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय उसे दबाने और लीपापोती करने का प्रयास कर रही है. यदि Supreme Court के सिटिंग जज की निगरानी में जांच नहीं कराई गई, तो इस मामले से जुड़े तथ्यों का सामने आना मुश्किल होगा.
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पीएसके