
नई दिल्ली, 12 जुलाई . भारत में इजरायली दूतावास ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर मार्शल आर्टिस्ट, लीडरशिप मेंटर और टेक्नोलॉजी एग्जीक्यूटिव सेंसेई इयाल नीर की किताब ‘बुडो फॉर लाइफ’ का आधिकारिक लॉन्च होस्ट किया. भारत में इजरायली राजदूत रियूवेन अजार की मौजूदगी में हुए इस इवेंट के दौरान लेखक ने किताब की पहली कॉपी उन्हें भेंट की. लेखक इयाल नीर ने न्यूज एजेंसी से खास बातचीत की.
बुडो मार्शल आर्ट्स के लिए एक होलिस्टिक और फिलॉसॉफिकल अप्रोच है जो जापानी कल्चर में गहराई से जुड़ा हुआ है. यह लड़ाई की फिजिकल तकनीक से आगे बढ़कर स्पिरिचुअल और एथिकल पहलुओं को भी शामिल करता है. बुडो केवल लड़ने की तकनीक नहीं है. यह आत्म-अनुशासन, सम्मान, आत्म-नियंत्रण, विनम्रता और चरित्र निर्माण पर भी जोर देता है.
ऑल इंडिया बुडो शोटो कराटे एसोसिएशन (एआईबीएसकेए) के चीफ इंस्ट्रक्टर सेंसेई इयाल नीर ने कहा, “इसका नाम है बुडो फॉर लाइफ. इसका मतलब है बुडो, पारंपरिक जापानी मार्शल आर्ट, सिर्फ खुद की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए एक टूल के तौर पर है. यह हर इंसान के लिए है. यहां तक कि उन लोगों के लिए भी जो मार्शल आर्ट की प्रैक्टिस नहीं करते, वे इसे अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में और अपने डेली रूटीन में इस्तेमाल कर सकते हैं.”
उनसे जब पूछा गया कि ‘क्या यह सिस्टम भारतीयों की मदद कर सकता है क्योंकि भारतीय जिंदगी बहुत व्यस्तता वाली है. उनके पास फिटनेस और दूसरी शारीरिक गतिविधियों के लिए काफी समय नहीं होता. इस पर सेंसेई इयाल नीर ने कहा, “सबसे पहले, यह हर इंसान के लिए काम का है. बेशक, भारतीय इसका हिस्सा हैं क्योंकि, आज की जिंदगी अक्सर बहुत तेज रफ्तार वाली होती है. दबाव, अफरा-तफरी होती है और लोग परेशान होते हैं. टूल्स बहुत ठोस हैं. जैसा कि मैंने कहा, यह एक सिस्टम है. यह कोई साफ आइडिया नहीं है. इसे पांच फेज और दस टूल्स में बांटा गया है जिन्हें लोग खुद पढ़ और अभ्यास कर सकते हैं. स्किल्स सीखने और फिर उन्हें अपनी जिंदगी में इस्तेमाल करने के लिए बहुत खास इंस्ट्रक्शन हैं. कल सुबह, जब आप अपने ऑफिस जाएंगे और किसी चुनौति, बातचीत, या प्रजेंटेशन का सामना करेंगे और प्रेशर आपकी परफॉर्मेंस पर असर डालेगा, तो आप अपनी सफलता और सेहत के लिए इन टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं.”
उन्होंने कहा, “यह किताब मेरे पहले वाले प्रोग्राम का अगला भाग है. इसका नाम ‘द बुडो वे’ है. इसकी एक वेबसाइट भी है, जहाँ मैं पिछले 10 साल से ज्यादा समय से काम कर रहा हूं. इस दौरान मैंने दुनिया के कई देशों में जाकर लेक्चर दिए, वर्कशॉप कराईं और ट्रेनिंग दी. मैंने हजारों लोगों के साथ काम किया है. इस वेबसाइट पर वीडियो, उदाहरण, प्रजेंटेशन और दूसरी उपयोगी सामग्री भी उपलब्ध है लेकिन इस किताब की खास बात यह है कि इसमें सारी जानकारी एक ही जगह, आसान और व्यवस्थित तरीके से दी गई है. इसलिए मैं इसे एक सिस्टम कहता हूं, क्योंकि इसमें हर बात क्रमबद्ध, समझने में आसान और एक-दूसरे से जुड़ी हुई है.”
आखिर में जब इयाल नीर से पूछा गया कि ‘बुडो, योग से कैसे अलग है तो उन्होंने कहा, “एक अंतर यह है कि बुडो का मकसद, कुछ मायनों में, सेल्फ-डिफेंस है, जबकि योग में सेल्फ-डिफेंस असल में अप्रासंगिक है. दूसरा, बुडो और मार्शल आर्ट्स में आप अक्सर एक साझेदार के साथ अभ्यास करते हैं. आपके सामने कोई होता है, इसलिए आपको दूसरे व्यक्ति से जुड़े होने, समझने, अंदाजा लगाने, सही टाइमिंग, असर, रणनीति के साथ रिस्पॉन्ड करने और कई दूसरे मानसिक और शारीरिक पहलुओं की जरूरत होती है, जिसमें किसी का सामना करना शामिल है. योग, ज्यादातर, कुछ ऐसा है जो आप खुद के साथ करते हैं, जो बेशक एक बहुत अच्छी बात है. यह अपने अंदर झांकने, मानसिक और शारीरिक खुद को ऑब्जर्व करने के बारे में है. इसमें और भी कई अंतर हैं.”
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केके/वीसी