इल्तिजा मुफ्ती ने केंद्र की नीतियों पर उठाए सवाल, बोलीं- डर से नहीं जीता जा सकता भरोसा

श्रीनगर, 13 जुलाई . पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेता इल्तिजा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन की नीतियों को लेकर सोमवार को तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने प्रशासन पर डर का माहौल बनाने और कश्मीर के इतिहास और राजनीतिक पहचान को बदलने की कोशिश करने का आरोप लगाया.

इल्तिजा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि जम्मू-कश्मीर में उन्होंने ऐसा ‘डरा-सहमा प्रशासन’ पहले कभी नहीं देखा. उन्होंने कहा कि इतिहास को बदलने और मिटाने की कोशिशें न केवल गलत हैं, बल्कि इससे लोगों और प्रशासन के बीच दूरी बढ़ती है. कश्मीरी समाज अपने इतिहास और राजनीतिक चेतना को पीढ़ियों से संजोकर रखता आया है.

उन्होंने कश्मीर के 1931 के शहीदों का जिक्र करते हुए कहा, “कश्मीरी लोग उन्हें अपने आदर्श और नायकों के रूप में देखते हैं. 1931 में जान गंवाने वाले 22 शहीदों ने राजनीतिक जागरूकता और सम्मान की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.”

अपने बयान में उन्होंने वैचारिक मतभेदों का भी जिक्र किया और कहा कि अलग-अलग समुदाय और क्षेत्र अपने-अपने ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को अलग नजरिए से देखते हैं. उन्होंने सावरकर और नाथूराम गोडसे का जिक्र करते हुए केंद्र की विचारधारा पर निशाना साधा और कहा कि इतिहास और नायकों को लेकर समाज में अलग-अलग दृष्टिकोण मौजूद हैं.

इल्तिजा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि लोगों को घरों में नजरबंद करना, निगरानी रखना और सार्वजनिक गतिविधियों से रोकना सामान्य स्थिति बहाल करने के दावों पर सवाल खड़े करता है. उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम लोगों के बीच विश्वास बढ़ाने के बजाय दूरी पैदा करते हैं.

उन्होंने ‘दिल की दूरी’ और ‘दिल्ली की दूरी’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह केंद्र सरकार की नीतियों और प्रशासनिक तरीकों से जुड़ा विषय है. उन्होंने दावा किया कि डर और दबाव की राजनीति से लोगों को जोड़ना संभव नहीं है. मुफ्ती ने 1931 के शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त किया और कहा कि कश्मीर के लोग अपने इतिहास और पहचान को लेकर संवेदनशील हैं.

एससीएच/वीसी