
मुंबई, 15 जुलाई . भारत-यूनाइटेड किंगडम मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लागू होने पर इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के अध्यक्ष पृथ्वीराज कोठारी ने कहा कि इस समझौते के लागू होने से आभूषण, हीरे के आभूषण, प्रयोगशाला में उत्पादित हीरे के आभूषण, पॉलिश किए गए हीरे और अन्य कीमती पत्थरों से बने उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है क्योंकि यह समझौता इन उत्पादों पर टैक्स का बोझ कम करता है.
न्यूज एजेंसी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत-यूके एफटीए के लागू होने से टैरिफ कम होने और उत्पादों की एक विस्तृत शृंखला के लिए बाजार पहुंच में सुधार होने से भारत के रत्न और आभूषण निर्यात को बड़ा प्रोत्साहन मिलने वाला है.
उन्होंने कहा, “हमारे आभूषणों का भारी निर्यात होगा – आभूषण, हीरे के आभूषण, प्रयोगशाला में निर्मित हीरे के आभूषण, हीरे, पॉलिश किए हुए हीरे – ये सब अब ब्रिटेन को निर्यात किए जाएंगे. इससे पहले, कर की दरें काफी ऊंची थीं. और आज, जिन वस्तुओं की वहां सबसे ज्यादा जरूरत है, वे यहां सस्ती हो जाएंगी.”
उन्होंने आगे कहा, “तो जब आप किसी भी देश के साथ संबंध स्थापित करते हैं, तो निस्संदेह यह दोतरफा व्यापार बन जाता है. और ब्रिटेन के साथ ऐसा होना हमारे लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. और जैसा कि आपने देखा है, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस के साथ भी ऐसा ही हो रहा है, हर जगह मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर हो रहे हैं. इसलिए भारतीय बाजार अब फल-फूल रहा है.”
पृथ्वीराज कोठारी ने से बातचीत में आगे कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश में कारोबारी माहौल में बड़ा बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि जब जीएसटी लागू किया गया था, तब इसका विरोध हुआ था, लेकिन आज जीएसटी संग्रह लगातार बढ़ रहा है, जो इसकी सफलता को दर्शाता है.
उन्होंने बताया कि नई पीढ़ी नई तकनीकों और आधुनिक व्यवस्थाओं को तेजी से अपना रही है. सरकार उद्योगों की जरूरतों को समझते हुए लगातार नई पहल कर रही है और कारोबार को आसान बनाने की दिशा में काम कर रही है. उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में उद्योग जगत ने ऐसे बदलाव देखे हैं, जो पहले कई दशकों तक संभव नहीं हो पाए थे.
इसके अलावा, जेम्स एंड ज्वैलरी मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के अध्यक्ष आदिल कोटवाल ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे सभी एसईईपीजेड (सांताक्रूज इलेक्ट्रॉनिक एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन) परीक्षा प्रबंधक और अन्य अधिकारी यहां उपस्थित हैं. यह भारत-ब्रिटेन साझेदारी के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण अवसर है, जिसे व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता कहा जाता है.
कोतवाल ने को बताया, “इसके तहत, 99 प्रतिशत उत्पादों पर अब शुल्क नहीं लगाया जाएगा.”
वहीं, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (ईजीआर) के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के साथ हुए एमओयू पर ऑगमोंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड के डायरेक्टर केतन कोठारी ने न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा, “आज हमने एनएसई के साथ एक ऐतिहासिक एमओयू साइन किया है. यह एक स्ट्रैटेजिक टाई-अप है, जिसमें हम रिटेल और बी2बी ग्राहकों के लिए लिक्विडिटी देने, कीमत तय करने, गोल्ड बनाने, रिडेम्पशन और फिजिकल डिलीवरी से जुड़ी सभी चीजों का ध्यान रखेंगे.”
उन्होंने आगे कहा, “ईजीआर भारत में गोल्ड खरीदने, रखने या ट्रेड करने का तरीका बदल देंगे, क्योंकि यह एक रेगुलेटेड प्रोडक्ट है. इसमें आप कम से कम 10 एमजी गोल्ड ले सकते हैं और फिर कम से कम 1 ग्राम गोल्ड की डिलीवरी भी ले सकते हैं. कीमत तय करने की प्रक्रिया बहुत अच्छी होगी क्योंकि कीमत के लिए सभी में कॉम्पिटिशन होगा, इसलिए आपको सबसे अच्छी कीमत मिलेगी.”
से बातचीत में केतन कोठारी ने आगे कहा कि भारत में सोने के कारोबार को अधिक संगठित और आधुनिक बनाने की दिशा में इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (ईजीआर) एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है.
उन्होंने बताया कि ईजीआर प्रणाली के जरिए लोगों के पास वर्षों से पड़े गोल्ड कॉइन और गोल्ड बार आय का नया स्रोत बन सकते हैं. इससे न केवल निवेशकों को ब्याज कमाने का अवसर मिलेगा, बल्कि देश के सोने के आयात में भी कमी आने की संभावना है.
केतन कोठारी ने आगे बताया कि भारत में अनुमानित 30,000 से 35,000 टन सोना मौजूद है. विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इसका लगभग 20 प्रतिशत, यानी करीब 7,000 टन सोना, गोल्ड कॉइन और गोल्ड बार के रूप में लोगों के पास रखा हुआ है. यह सोना फिलहाल किसी आर्थिक गतिविधि में उपयोग नहीं हो रहा है. ऐसे में इसे ईजीआर में बदलकर निवेशक ब्याज कमा सकते हैं.
उन्होंने स्पष्ट किया कि सोने के आभूषण (ज्वेलरी) रखने वाले ग्राहकों को अपने गहने ईजीआर में बदलने की आवश्यकता नहीं होगी. यह व्यवस्था मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है, जिनके पास निवेश के रूप में गोल्ड कॉइन या बार हैं. ऐसे निवेशक ऑगमोंट के ज्वेलर्स और टचपॉइंट्स के नेटवर्क के माध्यम से अपने सोने को ईजीआर में परिवर्तित कर सकते हैं और बदले में उन्हें तुरंत ईजीआर यूनिट्स मिल जाएंगी.
केतन कोठारी ने बताया कि इन ईजीआर यूनिट्स को बाद में सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (एसएलबी) प्लेटफॉर्म के जरिए ज्वेलरी निर्माताओं को उधार दिया जा सकता है. इसके बदले निवेशकों को ब्याज मिलेगा. उन्होंने इसकी तुलना बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से करते हुए कहा कि जिस तरह लोग बैंक में पैसा जमा कर उस पर ब्याज कमाते हैं, उसी तरह ईजीआर के जरिए सोने पर भी रिटर्न कमाया जा सकेगा.
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से ज्वेलरी निर्माताओं को भी फायदा होगा. उन्हें नया सोना आयात करने के बजाय ईजीआर के रूप में उपलब्ध सोना मिल जाएगा, जिससे उन्हें सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के जोखिम (हेजिंग) से भी राहत मिलेगी. निर्माता ईजीआर के जरिए भौतिक सोना प्राप्त कर आभूषण बनाएंगे और बाद में उसी रूप में सोना वापस कर सकेंगे. इससे पूरे इकोसिस्टम को लाभ मिलेगा और देश में सोने के आयात पर निर्भरता भी घट सकती है.
जीएसटी से जुड़े सवाल पर केतन कोठारी ने कहा कि ईजीआर एक ऐसा नया उत्पाद है, जिसमें पहली बार किसी भौतिक वस्तु (सोना) को एक वित्तीय सुरक्षा में बदला जा रहा है. उन्होंने बताया कि जब भौतिक सोने को वॉल्ट मैनेजर के पास जमा कर ईजीआर में बदला जाता है, तब इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर कुछ स्पष्टता की जरूरत थी. हालांकि इस मुद्दे का समाधान लगभग तैयार है और एनएसई के साथ मिलकर इस दिशा में काम किया गया है.
उन्होंने आगे कहा कि एक बार ईजीआर बनने और स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होने के बाद इसकी खरीद-बिक्री पर जीएसटी नहीं लगेगा, क्योंकि ईजीआर को एक सिक्योरिटी माना जाएगा. केवल तब जीएसटी देय होगा, जब निवेशक ईजीआर को रिडीम कर वास्तविक सोने की डिलीवरी लेंगे. उनके अनुसार, यह व्यवस्था पूरी तरह तार्किक और पारदर्शी है.
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डीबीपी