तेज प्रताप यादव ने दाखिल की जमानत अर्जी, वकील ने पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी प्रक्रिया पर उठाए सवाल

पटना, 27 जुलाई . बिहार के पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने सोमवार को सब-डिविजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (एसडीजेएम) की अदालत में जमानत की अर्जी दाखिल की. उनकी वकील निशा सिंह ने पुलिस की कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि गिरफ्तारी राजनीतिक कारणों से प्रेरित थी और इसमें उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.

याचिका दायर करने के बाद मीडिया से बात करते हुए वकील निशा सिंह ने दावा किया कि तेज प्रताप यादव पटना के एक शॉपिंग मॉल में गए थे, तभी पुलिस वहां पहुंची और उन्हें हिरासत में ले लिया.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गिरफ्तारी का समय जानबूझकर चुना गया था.

उन्होंने दावा किया, “पटना पुलिस ने उन्हें शनिवार को हिरासत में लिया ताकि रविवार को कोर्ट की छुट्टी होने के कारण उन्हें तुरंत कानूनी राहत न मिल सके.”

वकील ने पुलिस द्वारा अपनाई गई कानूनी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के समय कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी.

वकील सिंह ने आरोप लगाया, “बिना एफआईआर के गिरफ्तारी कानूनी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है. उन्हें पहले गिरफ्तार किया गया और एफआईआर बाद में दर्ज की गई.”

उन्होंने कोर्ट से जमानत अर्जी पर विचार करते समय तेज प्रताप यादव की मेडिकल स्थिति का ध्यान रखने का भी आग्रह किया. वकील के अनुसार, उन्हें डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है और जेल में रखने से उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है.

जमानत अर्जी में मांग की गई है कि उन्हें न्यायिक हिरासत में रखने के बजाय मेडिकल निगरानी में रखा जाए.

वकील ने पुलिस द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को भी चुनौती दी, जिनमें हत्या की कोशिश और दंगा भड़काने के आरोप शामिल हैं.

बचाव पक्ष के अनुसार, तेज प्रताप यादव ने छात्र विरोध प्रदर्शन के दौरान न तो कोई भड़काऊ भाषण दिया और न ही हिंसा को बढ़ावा दिया.

उन्होंने तर्क दिया कि वह बस अपनी गाड़ी से उस इलाके से गुजर रहे थे, छात्रों के अनुरोध पर थोड़ी देर के लिए बाहर निकले, राष्ट्रीय ध्वज लहराया और फिर वहां से चले गए.

जमानत अर्जी अब विचार के लिए एसडीजेएम कोर्ट के समक्ष है. इस बीच, पुलिस का कहना है कि यह मामला बिहार बंद विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के संबंध में दर्ज किया गया था और जांच जारी है. जमानत अर्जी पर कोर्ट के फैसले का इंतजार है.

एससीएच/वीसी