
नई दिल्ली, 27 जुलाई . केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ता और प्रवक्ता जश्न मनाते हुए दिख रहे हैं. इस वीडियो को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई है.
वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने जहां फंडिंग को लेकर सवाल उठाया, वहीं सीजेपी के पक्ष में सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने कहा कि अगर वे सवाल उठा रहे हैं तो सबूत पेश करें. सीजेपी के कार्यकर्ताओं को जश्न मनाने का अधिकार है.
वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर इस वीडियो पर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि दिल्ली में कई दिनों तक हिंसा और तनाव के बाद सीजेपी की लीडरशिप पांच सितारा होटल में संगीत बजाकर जीत का जश्न मना रही है. उन्होंने यह भी पूछा कि पूरे आंदोलन के दौरान यात्रा, खाने-पीने, रहने और लॉजिस्टिक्स का खर्च किसने उठाया? उन लोगों को पैसे किसने दिए, जिन्होंने दिल्ली में अशांति फैलाए रखी.
नई दिल्ली में से बातचीत में सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने कहा कि वरिष्ठ वकील को सीजेपी के वायरल वीडियो पर आरोप नहीं लगाना चाहिए, बल्कि प्रमाण पेश करने चाहिए. खुद मंत्रालय के सरकारी विभाग ने माना है कि प्रदर्शन में विदेशी कनेक्शन नहीं है. लोगों ने धरना स्थल पर अपने स्तर पर खाना पहुंचाया. सरकार ने बाद में रेस्टोरेंट तक सीपी में बंद करवाए.
उन्होंने कहा, “जश्न का माहौल है तो जश्न ही मनाएंगे. इस सरकार के 12 साल में दावा किया जाता था कि इस्तीफे नहीं होते, लेकिन युवाओं ने सरकार को झुकाया और इस्तीफा भी लिया.
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के ई-20 वाले बयान पर सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने कहा कि यह एक बहुत बड़ा घोटाला है. लोगों की गाड़ियां भी खराब हो रही हैं. मैंने सदन के भीतर इसकी चर्चा की मांग उठाई है.
पेपर लीक के खिलाफ सरकार द्वारा लाए जा रहे बिल पर पुष्पेंद्र सरोज ने कहा कि चर्चा तभी होगी, जब विपक्षी सांसदों द्वारा जो सवाल पूछे गए हैं, सरकार उनका जवाब देगी. देश से माफी मांगें, तब हम इस पर चर्चा करेंगे.
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बयान पर सपा सांसद ने कहा कि उनकी राजनीति अलग होती है. चर्चा इस बात की है कि छात्रों को अपना अधिकार पाने में दो महीने क्यों लगे. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पीएम मोदी से ज्यादा बार सदन में आते हैं. जहां तक बिल की बात है, तो ऐसा लगता है कि यह बिल 20 मिनट में तैयार किया गया है. उन्होंने राज्य को परीक्षा कराने का अधिकार देने की मांग की.
पुष्पेंद्र सरोज ने कहा कि यह तानाशाही सरकार है, जो लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं है. उन्होंने प्रधानमंत्री से संसद में देश के सामने जवाब देने की अपील की.
–
डीकेएम/वीसी