आरोप लगाने से पहले विपक्ष अपने कार्यकाल का इतिहास भी बताए : ओपी राजभर

चंदौली, 27 जुलाई . उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने चंदौली में पेपर लीक, विपक्ष के आरोपों, राम मंदिर चढ़ावा विवाद मामले में गठित एसआईटी समेत कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी. विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो दल आज सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें अपने शासनकाल का भी हिसाब देना चाहिए.

कांवड़ यात्रा को लेकर स्वामी आनंद स्वरूप महाराज के उस बयान पर, जिसमें गैर-हिंदुओं की दुकानों से सामान नहीं खरीदने की बात कही गई थी, ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि लोग अपनी आवश्यकता के अनुसार जहां सामान उपलब्ध होता है, वहीं से खरीदते हैं. यदि किसी स्थान पर आवश्यक वस्तु उपलब्ध नहीं होगी तो स्वाभाविक रूप से दूसरे स्थान से खरीदनी पड़ेगी.

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधियों की ओर से जश्न मनाए जाने के सवाल पर राजभर ने कहा कि छात्रों की जिन मांगों को लेकर वे दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे थे, उन पर सरकार ने गंभीरता से विचार किया. जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के बीच छात्रों के मुद्दों पर वार्ता हुई, जिसकी जानकारी प्रधानमंत्री को दी गई. प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों की मांगों को स्वीकार किया, जिसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया. साथ ही, पेपर लीक कराने वालों के खिलाफ 10 वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान करने वाला सख्त कानून भी लागू करने का भरोसा दिया.

असदुद्दीन ओवैसी द्वारा समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को साथ आने के निमंत्रण दिए जाने पर राजभर ने कहा कि ओवैसी की बात अपनी जगह सही हो सकती है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि मुस्लिम समाज का नेता कौन है? यदि अखिलेश यादव ओवैसी का प्रस्ताव स्वीकार करते हैं तो यह संदेश जाएगा कि मुस्लिम समाज उनके साथ नहीं है. ओवैसी गठबंधन की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ऐसा होता संभव नहीं दिखता.

कांग्रेस द्वारा भाजपा पर पेपर चोरी, चंदा चोरी और वोट चोरी जैसे आरोप लगाए जाने पर राजभर ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल, विशेषकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भी हर वर्ष पेपर लीक की घटनाएं होती थीं. विपक्ष को सरकार पर आरोप लगाने से पहले अपने कार्यकाल का इतिहास भी जनता के सामने रखना चाहिए.

राम मंदिर चंदा मामले में एसआईटी के पुनर्गठन के मुद्दे पर राजभर ने कहा कि यह Supreme Court के निर्देश पर किया गया है. एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन हो चुका है और अब जांच एजेंसी अपना काम करेगी. जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा और सरकार न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ रही है.

पीएसके/एबीएम