
रांची/धनबाद, 28 जुलाई . झारखंड के धनबाद जिले में अवैध कोयला खनन, परिवहन, अवैध वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा मंगलवार को 25 से अधिक ठिकानों पर की गई छापेमारी में सैकड़ों करोड़ की संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और अवैध संपत्ति का पता चला है. हालांकि, छापेमारी और जांच मंगलवार देर शाम तक जारी रहने की वजह से ईडी की ओर से फिलहाल आधिकारिक तौर पर इसका खुलासा नहीं किया गया है.
सूत्रों के अनुसार, ईडी की ओर से करीब 150 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की चल-अचल संपत्तियों को जब्त (सीज) करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. ईडी की रांची जोनल इकाई ने मंगलवार तड़के केंद्रीय सुरक्षा बलों की मदद से धनबाद, झरिया, लोयाबाद, केंदुआ, महुदा, बरवाअड्डा और आसपास के इलाकों में 25 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की.
यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज चार अलग-अलग ईसीआईआर के आधार पर की गई है. मामला अवैध कोयला खनन, कोयला परिवहन में अवैध वसूली और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से संबंधित है.
सूत्रों के मुताबिक, ईडी की कार्रवाई कोयला कारोबारी एलबी सिंह, अनिल गोयल तथा उनसे जुड़े कारोबारियों और सहयोगियों के परिसरों पर केंद्रित रही. जिन लोगों के यहां तलाशी ली गई, उनमें गणेश यादव, पप्पू मंडल, रोहित यादव, हरेंद्र चौहान, माधो सिंह, महेंद्र प्रताप, इम्तियाज अली, रजनीकांत शर्मा समेत कई अन्य शामिल हैं. इनमें कुछ लोग विभिन्न राजनीतिक दलों से भी जुड़े रहे हैं.
तलाशी के दौरान ईडी ने बैंक खातों के दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, बेनामी संपत्तियों के कागजात, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की. अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए हैं.
सूत्रों के अनुसार, अब तक मिली जानकारी से बड़े पैमाने पर निवेश, अचल संपत्तियों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के नेटवर्क का संकेत मिला है. कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानों पर स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया, हालांकि सुरक्षा बलों की मौजूदगी में तलाशी की प्रक्रिया जारी रही.
ईडी की ओर से देर शाम तक जब्ती या बरामदगी का कोई आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया गया था. सभी दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि अवैध कोयला कारोबार से अर्जित धन का निवेश किन-किन क्षेत्रों और संपत्तियों में किया गया.
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एसएनसी/डीकेपी