
नई दिल्ली, 29 जुलाई . सीपीआई (एम) नेता और केरल से राज्यसभा सांसद डॉ. वी सिवदासन की ओर से नियम 267 के तहत राज्यसभा के सभापति को नोटिस देकर मांग की गई है कि सदन को स्थगित किया जाए और नीट परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ विरोध करने वाले छात्रों पर जवाबी कार्रवाई के लिए पुलिस के इस्तेमाल सहित परिस्थितियों पर चर्चा की जानी चाहिए.
पिछले दिनों दिल्ली पुलिस की ओर से सीपीआई (एम) के कार्यालय में जाकर छात्र नेताओं को गिरफ्तार करने की कोशिश की गई थी. इसको लेकर उन्होंने केंद्र सरकार को संसद में जवाब देने की मांग की है. नोटिस में यह भी मांग की गई है कि 20 जून को छात्रों के विरोध प्रदर्शन के खिलाफ पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई और एनटीए की जांच Supreme Court की निगरानी में कराई जाए.
बीते दिन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और Supreme Court के अंतरिम आदेश को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था. उन्होंने मंगलवार को जारी बयान में कहा था कि सरकार अपने राजनीतिक हितों के लिए Supreme Court का इस्तेमाल नहीं कर सकती और न ही अदालत के आदेशों को अपने फायदे के लिए हथियार की तरह प्रयोग किया जाना चाहिए.
सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा था, “प्रदर्शनकारियों के संबंध में देश के सामने एक स्पष्ट सार्वजनिक वादा किया गया था, जिसका सम्मान होना चाहिए. सरकार को शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेनी चाहिए और अपने आश्वासनों पर अमल करना चाहिए.”
सीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि यदि कोई वास्तविक अपराधी खुलेआम घूम रहा है तो पुलिस को उसके पुराने मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत जमानत रद्द कराने के लिए अदालत का रुख करना चाहिए. ऐसे मामलों में यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति अब तक बिना किसी कार्रवाई के कैसे घूम रहा था.
सीजेपी प्रवक्ता ने सरकार से अपील की थी कि वह प्रदर्शनकारियों से किए गए सार्वजनिक वादों को पूरा करे और एफआईआर वापस लेने सहित सभी आश्वासनों को लागू करे. यदि ऐसा नहीं किया गया तो युवाओं में असंतोष और बढ़ सकता है.
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एसडी/पीएम