
नई दिल्ली, 29 जुलाई . राज्यसभा ने बुधवार को विपक्ष के जोरदार हंगामे और वॉकआउट के बीच राष्ट्र-गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया. चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह केवल एक विधायी संशोधन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक है. वहीं कांग्रेस व अन्य विपक्षी दल प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस बल के इस्तेमाल का विरोध करते नजर आए.
उन्होंने इस मुद्दे पर सदन में नारेबाजी की और फिर सदन की बहिष्कार किया. नित्यानंद राय ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि वर्ष 1971 के राष्ट्र-गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के सम्मान की रक्षा सुनिश्चित की गई थी. अब इस संशोधन के माध्यम से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का जानबूझकर अपमान करने को भी दंडनीय बनाने का प्रावधान किया गया है.
नित्यानंद राय ने कहा कि वंदे मातरम् की रचना वर्ष 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी. उन्होंने कहा था कि भले ही वह इसके प्रभाव को न देख पाएं, लेकिन एक दिन यह हर भारतीय के होंठों पर मंत्र की तरह होगा. मंत्री ने बताया कि वर्ष 1896 में गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर ने कांग्रेस के अधिवेशन में इस गीत का गायन किया था, जबकि वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी ने इसका पूर्ण गायन किया. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 1937 में कांग्रेस के अध्यक्ष बनने के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने वंदे मातरम् को केवल दो अंतरों तक सीमित कर दिया.
उन्होंने यह भी कहा कि 15 अगस्त 1947 की सुबह सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर आकाशवाणी से पंडित ओंकारनाथ ठाकुर ने संपूर्ण वंदे मातरम् का गायन किया था, जिससे स्वतंत्र भारत के प्रथम दिवस का शुभारंभ हुआ. गृह राज्य मंत्री ने कहा कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट किया था कि स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम् की ऐतिहासिक भूमिका को देखते हुए उसे राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान सम्मान प्राप्त होगा. राय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसे वंदे मातरम् से आपत्ति क्यों है, यह समझ से परे है. उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण कांग्रेस राष्ट्रगीत का विरोध कर रही है.
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के अनेक क्रांतिकारियों ने अपने अंतिम क्षणों में वंदे मातरम् का उद्घोष किया था. उन्होंने चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और खुदीराम बोस का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके बलिदान की गाथा वंदे मातरम् से जुड़ी हुई है. राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को साकार करने के लिए संपूर्ण वंदे मातरम् का सम्मान आवश्यक है. उन्होंने स्वामी विवेकानंद की भविष्यवाणी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत केवल आर्थिक महाशक्ति ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और मानवीय मूल्यों के आधार पर विश्वगुरु बनेगा.
गृह राज्य मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान राजनीति से ऊपर का विषय है. यह विधेयक किसी व्यक्ति या विचारधारा का नहीं, बल्कि राष्ट्र की गरिमा और साझा राष्ट्रीय चेतना का विषय है. उन्होंने सदन से अपील की कि विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर राष्ट्र की एकता, सम्मान और स्वतंत्रता संग्राम की अमर विरासत को और सुदृढ़ किया जाए. इसके उपरांत सदन में यह विधेयक पारित किया गया.
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जीसीबी/डीकेपी