
नोएडा, 30 जुलाई . नोएडा के फेस-3 थाने की पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ऐसे सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर ठगों को बेचते थे. इन खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट के नाम पर लोगों से ठगी कर वसूली गई रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था.
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, एक चेक बुक, एक स्टैम्प और चार लेटर हेड बरामद किए हैं. पुलिस के अनुसार, 29 जुलाई को बीट पुलिसिंग और गोपनीय सूचना के आधार पर थाना फेस-3 क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए सातों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अजब सिंह, प्रदीप, गुलाब सिंह लोधी, कौशल, सचिन, जिनेन्द्र सिंह और प्रियंका के रूप में हुई है. सभी आरोपी मिलकर साइबर अपराधियों के लिए म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने का काम करते थे.
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे. इसके बाद व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से साइबर अपराधियों के संपर्क में रहते थे. बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर की सिम अपने पास रखकर वे मोबाइल में डिंग एसएमएस नाम की एपीके फाइल इंस्टॉल करते थे. इस ऐप के जरिए बैंक खाते से जुड़े ओटीपी और एसएमएस उनके मोबाइल पर प्राप्त होते थे, जिससे साइबर ठग खातों में आई रकम को आसानी से संचालित और निकाल लेते थे.
पुलिस के मुताबिक, इन खातों का इस्तेमाल मुख्य रूप से डिजिटल अरेस्ट, फर्जी ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट स्कीम के नाम पर लोगों से ठगी करने में किया जाता था. कुछ समय बाद आरोपी इन खातों को बंद कर देते थे ताकि पुलिस जांच से बचा जा सके. जांच के दौरान इन खातों में लाखों रुपए के लेनदेन का पता चला है. इतना ही नहीं, इन बैंक खातों के खिलाफ देशभर में साइबर ठगी से संबंधित कुल 74 शिकायतें दर्ज मिली हैं, जिससे इस गिरोह के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है.
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को बेच देते थे. बदले में साइबर ठग उन्हें ठगी की रकम का एक निश्चित प्रतिशत कमीशन के रूप में देते थे, जिसे सभी आरोपी आपस में बांट लेते थे. पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और देशभर में साइबर अपराधियों की मदद कर रहा था. गिरफ्तार आरोपियों में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश और आगरा के निवासी शामिल हैं.
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66डी के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया है. नोएडा पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह का संबंध किन-किन राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों से था और अब तक कितने लोगों को इस नेटवर्क के जरिए ठगी का शिकार बनाया गया है.
पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है और आगे भी इस मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना है.
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पीकेटी/डीकेपी