कोयंबटूर की नोय्याल नदी में बह रहा बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज, एसटीपी प्रोजेक्ट में देरी से बढ़ी चिंता

कोयंबटूर, 4 अगस्त . केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के तहत नेशनल रिवर कंजर्वेशन डायरेक्टरेट (एनआरसीडी) से मंजूरी मिलने के बावजूद नोय्याल नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने के काम में बहुत कम प्रगति हुई है. इस वजह से कोयंबटूर जिले की 9 नगर पंचायतें अभी भी बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी नदी में बहा रही हैं.

इरुगुर, सुलूर, कन्नमपलयम, वेल्लालोर, पेरूर, पूलुवापट्टी, वीरपांडी, अलंदुरई और थोंडामुथुर से होने वाले सीवेज प्रदूषण की समस्या को हल करने के लिए ‘नदंथई वाझी कावेरी’ योजना के तहत 2024 में एसटीपी प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई थी.

इस पहल का मकसद इन स्थानीय निकायों से निकलने वाले सीवेज को नोय्याल नदी में पहुंचने से पहले इकट्ठा करना और उसे ट्रीट करना है.

यह प्रोजेक्ट नदी के पानी की गुणवत्ता सुधारने और नदी के रास्ते में आने वाले इलाकों में भूजल को और दूषित होने से बचाने के लिए बहुत जरूरी माना जाता है. हालांकि, मंजूरी मिलने के लगभग दो साल बाद भी, प्रस्तावित ट्रीटमेंट सुविधाओं को लागू करने का काम अभी तक तेजी नहीं पकड़ पाया है.

तमिलनाडु में बहने वाली कावेरी नदी की एक प्रमुख सहायक और मौसमी नदी है, जो कोयंबटूर जिले में पश्चिमी घाट से निकलती है और कावेरी में मिलने से पहले कोयंबटूर, तिरुप्पुर, इरोड और करूर जिलों से होते हुए लगभग 158.35 किलोमीटर तक बहती है. नदी का लगभग 62.21 किलोमीटर हिस्सा कोयंबटूर जिले से गुजरता है, जहां इसके जल तंत्र में 17 बांध और 25 तालाब शामिल हैं. नदी के किनारे बसे स्थानीय निकायों से बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज बहाना पर्यावरण के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है.

मंजूर की गई फंडिंग व्यवस्था के तहत, केंद्र सरकार से प्रोजेक्ट की लागत का 60 प्रतिशत हिस्सा उठाने की उम्मीद है, जबकि तमिलनाडु सरकार बाकी 40 प्रतिशत हिस्सा देगी. नोय्याल के किनारे रहने वाले किसानों ने चिंता जताई है कि गंदा पानी लगातार बहाए जाने से भूजल दूषित हो रहा है और खेती के काम पर असर पड़ रहा है.

एक किसान और गैर-राजनीतिक किसान संघ के सदस्य राजन अरुणाचलम ने कहा कि शुरुआती घोषणा के बाद एटीपी बनाने के काम में लगभग कोई प्रगति नहीं हुई है.

उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों से बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी लगातार नदी में जा रहा है, जिससे भूजल प्रदूषित हो रहा है और नोय्याल के किनारे के इलाकों में खेती करना मुश्किल होता जा रहा है.

कोयंबटूर के जिला कलेक्टर पवनकुमार जी. गिरियप्पनावर ने कहा कि नोय्याल नदी के किनारे स्थित स्थानीय निकायों तक इस प्रोजेक्ट को बढ़ाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है.

उन्होंने बताया कि यह प्रोजेक्ट अभी ‘डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट’ के चरण में है और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसे लागू किया जाएगा.

वीकेयू/पीएम