
नई दिल्ली, 4 अगस्त . नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने Supreme Court में हलफनामा दाखिल कर बताया है कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं. सरकार ने कोर्ट को बताया कि 2026 में लागू नए कानून के तहत अब पेपर लीक और नकल जैसे अपराधों पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है.
हलफनामे में केंद्र ने कहा कि नए कानून के तहत परीक्षा में पेपर लीक, नकल या किसी भी तरह की धांधली करने वालों को 10 साल तक की जेल और 5 करोड़ रुपए तक का जुर्माना हो सकता है. सरकार का मकसद भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना है.
सिस्टम में सुधार के लिए सरकार ने इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स भी गठित की है. यह समिति मौजूदा परीक्षा प्रणाली की खामियों की समीक्षा करेगी और उसे और सुरक्षित बनाने के लिए सुझाव देगी. केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि यह टास्क फोर्स तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. रिपोर्ट के आधार पर ही आगे के बड़े बदलाव किए जाएंगे.
सरकार ने 21 जून को दोबारा हुई नीट-यूजी परीक्षा में सुरक्षा के इंतजामों का भी ब्योरा दिया. हलफनामे के अनुसार दोबारा परीक्षा के दौरान देशभर के परीक्षा केंद्रों पर 51,311 जैमर लगाए गए थे ताकि मोबाइल या किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का इस्तेमाल न हो सके. इसके अलावा 1.38 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाकर हर गतिविधि पर नजर रखी गई. परीक्षा की निगरानी के लिए 87,000 कर्मचारी तैनात किए गए थे. इन कर्मचारियों ने अभ्यर्थियों की तलाशी ली और बायोमेट्रिक जांच भी की.
केंद्र ने कोर्ट को यह भी बताया कि नीट-यूजी को भविष्य में कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी सीबीटी में बदलने पर विचार चल रहा है. सीबीटी मोड से पेपर लीक की संभावना काफी कम हो जाएगी और रिजल्ट भी जल्दी जारी किए जा सकेंगे. हालांकि सरकार ने कहा कि इस पर अंतिम फैसला समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा.
–
एससीएच/एबीएम