मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके भाई की जमानत की शर्तों में ढील दी

चेन्नई, 5 अगस्त . मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु के पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी और उनके भाई अशोक कुमार को अग्रिम जमानत की शर्तों में ढील दी है. इन शर्तों के तहत उन्हें एक मामले में जांच अधिकारी के सामने दिन में दो बार पेश होना पड़ता था. यह मामला टीवीके के एक विधायक को हॉर्स-ट्रेडिंग के जरिए लुभाने की कथित कोशिश से जुड़ा है.

जस्टिस जी.के. इलंथिरायण ने सेंथिल बालाजी और अशोक कुमार की उन याचिकाओं पर यह आदेश दिया, जिनमें अग्रिम जमानत देते समय लगाई गई शर्तों में बदलाव की मांग की गई थी.

यह मामला ट्रिप्लिकेन पुलिस ने तब दर्ज किया था जब आरोप लगे कि कथित तौर पर ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ की कोशिश के तहत कृष्णगिरि जिले के उथंगराई विधानसभा क्षेत्र से टीवीके विधायक इलैयाराजा को फुसलाने या मनाने की कोशिश की गई थी.

जांच के सिलसिले में, ट्रिप्लिकेन पुलिस ने सेंथिल बालाजी और उनके भाई को पूछताछ के लिए पेश होने का समन जारी किया था.

समन मिलने के बाद, इस मामले में गिरफ्तारी की आशंका के चलते दोनों ने अग्रिम जमानत के लिए मद्रास हाई कोर्ट का रुख किया.

अग्रिम ज़मानत देते समय, जस्टिस इलंथिरायण ने एक शर्त रखी थी कि दोनों याचिकाकर्ताओं को हर दिन दो बार,सुबह 10.30 बजे और शाम 5.30 बजे जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा. इसके बाद से वे पुलिस के पास जाकर और अटेंडेंस रजिस्टर पर हस्ताक्षर करके इस निर्देश का पालन कर रहे थे.

इसके बाद में सेंथिल बालाजी और अशोक कुमार ने हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर करके रिपोर्टिंग की शर्त में ढील देने की मांग की.

जब याचिकाओं पर सुनवाई हुई, तो दोनों भाइयों की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली एक डिवीजन बेंच ने इस मामले में ट्रिप्लिकेन पुलिस द्वारा की जा रही पूरी जांच पर रोक लगा दी है.

जांच पर रोक को देखते हुए, याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि उन्हें दिन में दो बार जांच अधिकारी के सामने पेश होने की शर्त जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है. इसलिए उन्होंने अटेंडेंस की शर्त से पूरी तरह छूट मांगी.

इस दलील को मानते हुए, जस्टिस इलंथिरायण ने सेंथिल बालाजी और अशोक कुमार को हर दिन सुबह 10.30 बजे और शाम 5.30 बजे पुलिस स्टेशन में पेश होने की शर्त से मुक्त कर दिया. हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि इस छूट का मतलब यह नहीं है कि अगर जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसी उनसे पूछताछ नहीं कर सकती.

जज ने स्पष्ट किया कि जांच से जुड़े आदेशों के दायरे में रहते हुए, पुलिस सेंथिल बालाजी और अशोक कुमार को समन जारी करने और जरूरत पड़ने पर पूछताछ के लिए उन्हें बुलाने के लिए स्वतंत्र होगी.

डीकेएम/पीएम