सीबीआई ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम में दाखिल की चार्जशीट, डेढ़ करोड़ की ठगी का मामला

नई दिल्ली, 5 अगस्त . सीबीआई ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम मामले में बड़ी कार्रवाई की है. बताया गया कि दिल्ली के एक वरिष्ठ नागरिक को डिजिटल अरेस्ट घोटाले में 1.6 करोड़ रुपए का चूना लगाया गया था. इस घोटाले में अपराधियों ने खुद को कानून प्रवर्तन और न्यायिक अधिकारी बताकर उन्हें वीडियो कॉल किए और उनसे धनराशि ऐंठ ली.

सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले को दिल्ली पुलिस से सीबीआई को सौंप दिया और सीबीआई ने इसे जनवरी 2026 में दर्ज किया. सीबीआई ने एक निजी फर्म के आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसके चालू खाते का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी की रकम प्राप्त करने के लिए किया गया था. अपराध की धनराशि का एक हिस्सा एक्सिस बैंक के डिप्टी मैनेजर को धनराशि की हेराफेरी में मदद करने के लिए भी दिया गया था.

अब तक की जांच से पता चला है कि इस डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी को अंजाम देने में दक्षिण-पूर्व एशिया स्थित एक अंतरराष्ट्रीय संगठित गिरोह की भूमिका थी. इस मामले में आपराधिक साजिश, चोरी की संपत्ति प्राप्त करने, धोखाधड़ी करने और बीएनएस के तहत जाली दस्तावेजों का उपयोग करने के अपराधों, आईटी अधिनियम के तहत कंप्यूटर संसाधनों का उपयोग करके धोखाधड़ी और प्रतिरूपण के अपराधों और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी के अपराधों के लिए आरोप पत्र दायर किया गया है.

सीबीआई बैंकिंग और दूरसंचार अवसंरचना के दुरुपयोग की अनुमति देकर साइबर अपराधियों की सहायता करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराती है.

जनता को धोखाधड़ी वाली योजनाओं, विशेष रूप से तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ की रणनीति से सावधान रहने की सलाह दी जाती है. सीबीआई इस बात पर जोर देती है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ की कोई कानूनी अवधारणा नहीं है. नागरिकों से आग्रह है कि वे घबराएं नहीं और ऐसी कॉलों का पालन न करें.

जनता को धोखाधड़ी वाली निवेश योजनाओं और कानून प्रवर्तन या नियामक एजेंसियों के नाम पर की जाने वाली फर्जी कॉलों से भी सावधान किया जाता है. किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों या साइबर अपराध पोर्टल को दी जानी चाहिए.

एमएस/