
नई दिल्ली, 5 अगस्त . संसद के मानसून सत्र के दौरान परिसीमन और सदन की कार्यवाही को लेकर बुधवार को कांग्रेस और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. कांग्रेस ने सरकार पर भ्रम फैलाने और चर्चा से भागने का आरोप लगाया, वहीं पार्टी नेताओं ने कहा कि विपक्ष हर मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है, लेकिन सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी.
कांग्रेस के महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा, “आज केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हमसे परिसीमन के मुद्दे पर बात की. उन्होंने इस मामले पर हमसे चर्चा की. हमारे सांसदों ने हमें बताया कि उन्होंने परिसीमन के बारे में बात की, और हमने उनसे कहा कि हम उन्हें बाद में जवाब देंगे. इसमें और कुछ नहीं है. हमारा रुख बिल्कुल साफ है. पिछले संसदीय सत्र के दौरान हमने जो रुख अपनाया था, हम उसी पर कायम हैं. इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है. विपक्ष का रुख बिल्कुल साफ है. उन्हें भ्रम नहीं फैलाना चाहिए. संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर, वह यह कहकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि हर समय अनौपचारिक बातचीत हो रही है.”
परिसीमन बिल पर सरकार द्वारा विशेष सत्र बुलाए जाने की खबरों पर वेणुगोपाल ने सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “हमें कुछ नहीं पता. विशेष सत्र का मकसद क्या है? जो व्यक्ति परिसीमन बिल लाने वाला है, वह तो आ ही नहीं रहा है और इसी इमारत में छिपा हुआ है. उसमें संसद आने की हिम्मत भी नहीं है. वे विपक्ष का रुख जानना चाहते थे. ऐसी अफवाहें हैं कि उन्होंने परिसीमन के बारे में बात की और हमने कहा कि हम वापस आएंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है. हमारा रुख बिल्कुल साफ है. संसद के पिछले सत्र में हमने जो रुख अपनाया था, हम उसी पर कायम हैं. इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है.”
कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने कहा कि पार्टी हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है. हां, उन्हें इसे लाने दें. हम चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार हैं, चाहे वह एफसीआरए पर हो या परिसीमन पर. हम हर मुद्दे पर बहस करने के लिए तैयार हैं. लेकिन हम सरकार की कमियों को लेकर अपनी चिंताएं भी उठाएंगे. यह हमारी जिम्मेदारी है. अगर हम ऐसा नहीं कर सकते, तो विपक्ष के होने का कोई मतलब नहीं है. राहुल गांधी रोज सदन में आते हैं और कार्यवाही में हिस्सा लेते हैं. ऐसा लगता है कि माननीय गृह मंत्री और माननीय प्रधानमंत्री को ही कोई फोबिया है, क्योंकि पहले दिन के अलावा वे सदन में नहीं आ रहे हैं.”
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने सदन में न्यायपालिका पर हो रही चर्चा के दौरान विपक्ष को रोके जाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “आज न्यायपालिका पर चर्चा हो रही थी और सभी इस पर बोल रहे थे. लेकिन, वे बार-बार कह रहे थे, ‘नहीं, आप यह नहीं कह सकते, आप वह नहीं कह सकते.’ विपक्ष बोल रहा है कि क्या अब आप तय करेंगे कि विपक्ष को किस तरह का भाषण देना चाहिए? वह भी आपकी मर्जी से तय होगा?”
शुक्ला ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और किरेन रिजिजू की मुलाकात का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, “विपक्ष के नेता को उचित सम्मान मिलना चाहिए. मैं भी संसदीय कार्य मंत्री रहा हूं, और जब भी चर्चाएं होती थीं, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज विपक्ष के नेता होते थे. मैं हमेशा उनकी बातें सुनकर ही आगे बढ़ता था.”
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक अलग मुद्दा उठाते हुए मंदिर ट्रस्ट पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा, “वे लोग भगवान राम के मंदिर की सुरक्षा तक नहीं कर सके, उन्होंने मंदिर के लिए आए दान के पैसे की चोरी होने दी. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पूरा ट्रस्ट बीजेपी और आरएसएस से जुड़े लोगों से बना है.”
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एससीएच/एबीएम