भारत-रूस रक्षा साझेदारी, नई दिल्ली में दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों की अहम बैठक

नई दिल्ली, 6 अगस्त . भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती देने के लिए नई दिल्ली में एक अहम बैठक हो रही है. 4 से अगस्त से हुई यह वार्ता 7 अगस्त तक जारी रहेगी. यह भारत-रूस आर्मी ‘लैंड सिस्टम सब ग्रुप मीटिंग’ है. दोनों देशों के बीच इस व्यवस्था के तहत यह पांचवीं बैठक है. दिल्ली में हो रही इस बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भविष्य के सहयोग पर मंथन कर रहे हैं.

इस बैठक में दोनों देशों ने रक्षा संबंधों को और मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया. रक्षा उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया. नई सैन्य तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी. दोनों पक्षों ने संयुक्त विकास और औद्योगिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की. यहां भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह कर रहे हैं. वहीं, रूसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रूसी रक्षा मंत्रालय के मुख्य बख्तरबंद निदेशालय के उप प्रमुख मेजर जनरल अलेक्जेंडर तुफेकची कर रहे हैं.

भारतीय सेना ने बताया कि यह बैठक भारत-रूस सैन्य एवं सैन्य-तकनीकी सहयोग तंत्र के तहत आयोजित की जा रही है. यह मंच दोनों देशों के बीच रक्षा परियोजनाओं और सैन्य आधुनिकीकरण से जुड़े मुद्दों पर नियमित संवाद का माध्यम है. बता दें कि भारत और रूस दशकों से रक्षा क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदार रहे हैं. मौजूदा बैठक को इसी रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

गौरतलब है कि इस साल भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव के साथ मुलाकात की थी. इस मुलाकात के बाद राजनाथ सिंह ने इस बातचीत को बेहतरीन और सार्थक बताया था. यह बातचीत किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई थी.

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई थी, जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं. दरअसल भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत रक्षा संबंध रहे हैं. भारतीय सशस्त्र बलों में उपयोग होने वाले कई प्रमुख सैन्य उपकरण और प्लेटफॉर्म रूस से जुड़े हैं. इसमें लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां और मिसाइल प्रणाली जैसे अहम संसाधन शामिल हैं, जो भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत बनाते हैं.

दोनों देश रक्षा उत्पादन में सहयोग को और विस्तार देने पर सहमति जताते रहे हैं. भारत में ही संयुक्त रूप से रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे देश की आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलकी और तकनीकी क्षमता में भी वृद्धि होगी.

जीसीबी/डीकेपी