
कानपुर, 7 अगस्त . ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को इस बार कानपुर देहात की महिलाएं अपने हाथों से रंग दे रही हैं. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े 96 स्वयं सहायता समूहों की 360 महिलाएं दिन-रात मेहनत कर करीब तीन लाख तिरंगे तैयार कर रही हैं.
यह पहल सिर्फ अभियान को मजबूती नहीं दे रही बल्कि गांव की गरीब, विधवा, दिव्यांग और कम पढ़ी-लिखी महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का जरिया भी बन गई है. कानपुर देहात में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान पूरे उत्साह के साथ चल रहा है. जिले की 360 महिलाएं झंडा बनाने में जुटी हैं. हर तिरंगा 30 इंच लंबा और 20 इंच चौड़ा बनाया जा रहा है. सरकार ने इसकी निर्धारित कीमत 20 रुपए रखी है.
तैयार होने वाले ये तिरंगे जिले के स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और सभी सरकारी भवनों पर लगाए जाएंगे. राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारियों के मुताबिक जिले को करीब तीन लाख तिरंगे बनाने का लक्ष्य मिला था, जिसे महिलाएं तय समय में पूरा करने में लगी हैं.
उमंग स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष प्रतिमा सिंह ने से कहा कि विभाग का मकसद ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को रोजगार देना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करना है, ताकि आत्मनिर्भर भारत के साथ आत्मनिर्भर महिलाएं भी तैयार हो सकें.
कभी जो महिलाएं घर की चारदीवारी तक सीमित थीं, आज वे अपने हुनर से पहचान बना रही हैं. स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर वे हर महीने अच्छी आय कमा रही हैं और परिवार की जिम्मेदारियां भी निभा रही हैं.
गांव की गरीब, विधवा, दिव्यांग और कम शिक्षित महिलाओं के लिए यह योजना उम्मीद की नई किरण बनकर आई है. महिलाओं का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस पहल ने उन्हें सम्मान के साथ काम दिया है, जिससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है.
इन महिला समूहों ने पिछले साल भी अपनी कला का परिचय दिया था. तब इन्होंने 200 मीटर लंबा तिरंगा तैयार किया था. अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल बनाए गए झंडों में करीब 6 रुपए का मुनाफा मिला था.
इसमें जो लागत लागत है उसे स्वयं सहायता समूह की महिलाएं वहन करेंगी और जो मुनाफा होगा वह सीधे समूह की महिलाओं को मिलेगा.
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उपायुक्त अशोक कुमार ने कहा, ‘हर घर तिरंगा’ के जरिए कानपुर देहात की महिलाएं केवल झंडा ही नहीं बना रही हैं. वे आत्मनिर्भरता, सम्मान और सशक्तीकरण की नई कहानी भी लिख रही हैं.
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वीकेयू/पीएम