
नई दिल्ली, 8 अगस्त . झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की कंबाइंड सिविल सर्विसेज (प्रारंभिक) परीक्षा-2025 में कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों की जांच की मांग को लेकर Supreme Court में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है. यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन द्वारा दायर की गई है.
याचिका में Supreme Court से अनुरोध किया गया है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए. वैकल्पिक रूप से Supreme Court के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या झारखंड से बाहर के किसी हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग भी की गई है.
याचिकाकर्ता ने अदालत से 19 अप्रैल को आयोजित जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने का निर्देश देने की भी मांग की है. याचिका में कहा गया है कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए.
याचिका के अनुसार, जांच समिति में फॉरेंसिक साइंस, सूचना प्रौद्योगिकी, परीक्षा सुरक्षा, ओएमआर मूल्यांकन, साइबर सुरक्षा और लोक प्रशासन के विशेषज्ञों को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि परीक्षा प्रक्रिया के प्रत्येक पहलू की गहन जांच की जा सके.
Supreme Court से यह भी आग्रह किया गया है कि परीक्षा से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों और रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का आदेश दिया जाए. इनमें ओरिजिनल ओएमआर शीट, अभ्यर्थियों की कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, आंसर-की, उपस्थिति पत्रक, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, डिस्पैच रजिस्टर, परीक्षा केंद्रों की रिपोर्ट, स्कैनिंग रिकॉर्ड, मूल्यांकन डेटा, रिजल्ट जनरेशन डेटा तथा अन्य संबंधित दस्तावेज शामिल हैं.
याचिका में कहा गया है कि इन दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाना आवश्यक है, ताकि जांच के दौरान किसी भी संभावित साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ न हो और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके.
बता दें कि झारखंड में बड़ी संख्या में छात्र आंदोलन और भूख हड़ताल कर रहे हैं. शुक्रवार को छात्रों के प्रतिनिधियों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई. हालांकि, आंदोलन खत्म करने का ऐलान अभी नहीं हुआ है और न ही प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच बात बनने जैसी कोई खबर सामने आई है. इस बीच मामला अब Supreme Court तक पहुंच गया है.
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एएमटी/डीकेपी