
कोलकाता, 11 अगस्त . समुद्र में आवाजाही की आजादी बनाए रखने और देश में ऊर्जा की सप्लाई व अन्य जरूरी सामानों का लगातार प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए नौसेना को और भी कई एडवांस्ड युद्धपोतों की जरूरत होगी. वॉरशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन के कंट्रोलर, वाइस एडमिरल संजय साधु ने मंगलवार को ये बातें कहीं.
वाइस एडमिरल साधु, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) लिमिटेड में नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (एनजीओपीवी) ‘श्रुति’ के लॉन्च के मौके पर बोल रहे थे.
उन्होंने कहा, “यह हमारे शिपयार्ड्स की एडवांस्ड वॉरशिप बनाने की क्षमता का जश्न है. जब यह एनजीओपीवी बनकर तैयार हो जाएगा तो इसमें 85 प्रतिशत हिस्सा भारत में बना होगा.”
वाइस एडमिरल ने बताया कि नेवी ने 44 प्लेटफॉर्म्स का ऑर्डर दिया है और ये सभी भारतीय शिपयार्ड्स में बनाए जा रहे हैं, जो सरकार द्वारा बढ़ावा दी जा रही ‘आत्मनिर्भरता’ को साफ तौर पर दिखाता है.
उन्होंने कहा, “इस इलाके के हालात को देखते हुए जैसे यूएस-ईरान युद्ध, जिसका होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम रास्तों पर असर पड़ा है, नेवी हमारे समुद्री रास्तों की सुरक्षा करने और भारत की ऊर्जा जरूरतों व अन्य जरूरी सामान की सप्लाई सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रही है.”
उन्होंने कहा, “एनजीओपीवी श्रुति जैसे बहु-उपयोगी वॉरशिप देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा करने के साथ-साथ अन्य भूमिकाएं निभाने में भी अहम भूमिका निभाएंगे.”
उन्होंने शिपबिल्डिंग इंडस्ट्री से जुड़े सभी लोगों से अपील की कि वे नेवी और अन्य ग्राहकों के लिए बेहतरीन क्वालिटी वाले प्लेटफॉर्म्स का निर्माण सुनिश्चित करें.
वाइस एडमिरल साधु ने कहा, “भारत एक सच्चा समुद्री देश है, जिसकी तटरेखा बहुत लंबी है. सरकार भारत को ग्लोबल शिपबिल्डिंग हब बनाने की योजना बना रही है. 2035 तक सरकार चाहती है कि भारतीय शिपयार्ड्स दुनिया भर में बनने वाले जहाजों का 5 प्रतिशत हिस्सा बनाएं. सरकार ने कहा कि तब तक भारत के कमर्शियल जहाजों के बेड़े का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा भारत में बना होना चाहिए.”
उन्होंने आगे बताया कि सरकार ने इसके लिए 70,000 करोड़ रुपए तय किए हैं.
उन्होंने याद दिलाया कि लक्ष्य यह है कि 2047 तक भारत शिपबिल्डिंग देशों की लिस्ट में 5वें स्थान पर हो. वाइस एडमिरल ने कहा, “यह हासिल किया जा सकता है. वहां तक पहुंचने के लिए हमारे सभी कर्मचारियों और अन्य लोगों को बहुत मेहनत करनी होगी. उन्हें लक्ष्य हासिल करने और बेहतरीन क्वालिटी वाले जहाज बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी.”
उन्होंने अन्य शिपयार्ड्स के कर्मचारियों और सुपरवाइजरों सहित ज्यादा लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए हिंदी में बात की.
–
एससीएच/डीकेपी