
नई दिल्ली, 14 अगस्त . Supreme Court ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा कि इंस्टाग्राम और एक्स जैसे सोशल मीडिया मध्यस्थ बच्चों के यौन शोषण के मामलों की रिपोर्ट पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों को क्यों नहीं दे रहे हैं.
2024 में Supreme Court ने एक अहम फैसले में कहा था कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखना और डाउनलोड करना एक जुर्म है और सोशल मीडिया इंटरमीडियरी के लिए ऐसे कंटेंट की रिपोर्ट पुलिस को करना जरूरी है. अगर सोशल मीडिया इंटरमीडियरी ऐसे मामलों की रिपोर्ट पुलिस को नहीं करते हैं तो वे क्रिमिनल तौर पर जवाबदेह बन जाते हैं.
एक एनजीओ जस्ट राइट्स फॉर चाइल्ड की तरफ से दायर एक अर्जी में Supreme Court में कहा गया था कि केंद्र और सोशल मीडिया इंटरमीडियरी Supreme Court के 2024 के फैसले का पालन नहीं कर रहे हैं. इस पर Supreme Court ने केंद्र को नोटिस जारी किया और पूछा कि सोशल मीडिया इंटरमीडियरी चाइल्ड पोर्नोग्राफी की रिपोर्ट पुलिस को क्यों नहीं कर रहे हैं?
सीनियर एडवोकेट एच.एस. फुल्का ने कहा, “इन दिनों चल रहे इस मुद्दे को लेकर कि इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण के वीडियो न सिर्फ तेजी से फैल रहे हैं, बल्कि उन्हें सक्रिय रूप से बढ़ावा भी दिया जा रहा है. भारत सरकार ने इंस्टाग्राम को रोकने के लिए बहुत सख्त कदम उठाए हैं. हालांकि, 2 सितंबर 2024 को Supreme Court ने एक फैसला सुनाया. उस फैसले में Supreme Court ने साफ़ तौर पर कहा कि सोशल मीडिया चलाने वाले सभी लोग – ये मध्यस्थ , चाहे वह मेटा हो, टेलीग्राम हो या कोई भी हो जो इन्हें चला रहा है – यह उनकी ज़िम्मेदारी है कि जब भी बच्चों के यौन शोषण का कोई वीडियो सामने आए, तो वे न सिर्फ उसे ब्लॉक करें बल्कि पुलिस को इसकी रिपोर्ट भी करें.”
एच.एस. फुल्का ने आगे कहा, “सोशल मीडिया से चाइल्ड पोर्नोग्राफी को डाउनलोड करने और देखने वालों के खिलाफ पोक्स एक्ट के तहत केस चलने की बात Supreme Court ने अपने फैसले में कही है. ऐसे वीडियो डाउनलोड कर वायरल करने वालों के खिलाफ 7 साल की सजा है.”
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ओपी/एएस