रांचीः आंदोलित छात्रों ने हेमंत-राहुल और तेजस्वी के पुतले फूंके, सरकार ने फिर से भेजा वार्ता का न्योता

रांची, 16 अगस्त . झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन के 23वें दिन छात्रों ने रविवार शाम को रांची विरोध मार्च निकाला और राज्य के सीएम हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बिहार के राजद नेता तेजस्वी यादव के पुतले फूंके.

छात्र आंदोलन स्थल जयपाल सिंह स्टेडियम से जुलूस की शक्ल में निकले और अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचे. उन्होंने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.

इस बीच, राज्य सरकार ने एक बार फिर बातचीत के जरिए गतिरोध खत्म करने की पहल की है. सरकार की ओर से आंदोलनरत छात्रों को 17 अगस्त को दोपहर दो बजे वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया है. छात्रों को उनके विधिक सलाहकारों के साथ बातचीत में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है.

अनुमंडल पदाधिकारी और एडीएम, लॉ एंड ऑर्डर की ओर से छात्रों को सरकार के इस प्रस्ताव की जानकारी दी गई है. छात्रों का आंदोलन जेपीएससी और जेएसएससी की नियुक्तियों में कथित घोटाले और व्यापक भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चल रहा है.

आंदोलनकारी जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने के साथ भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं. हालांकि, पूर्व में सरकार और छात्रों के बीच हुई वार्ताओं में परीक्षा सुधार से जुड़ी कई मांगों पर सहमति बन चुकी है. सरकार की ओर से 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा और बैकलॉग सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने की घोषणा भी की गई है.

इसके बावजूद, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग को लेकर गतिरोध बना हुआ है. इससे पहले जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने मुख्यमंत्री आवास घेराव का ऐलान किया था. मंच ने कहा है कि 20 अगस्त को राज्य के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची पहुंचेंगे और मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे.

मंच ने पहली बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग भी उठाई है. रविवार को मार्च के दौरान छात्रों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. अल्बर्ट एक्का चौक पर पुतला दहन के बाद आंदोलनकारियों ने कहा कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा.

छात्र नेताओं ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा. उनका कहना है कि राहुल गांधी ने पहले छात्रों की मांगों का समर्थन किया था, लेकिन अब उन्हें राज्य सरकार के प्रति अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए. छात्र नेताओं ने कहा है कि अब तक आंदोलन शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से चलाया गया, लेकिन सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया गया है. अब सभी की नजर 17 अगस्त को प्रस्तावित सरकार और छात्रों की वार्ता पर है.

एसएनसी/एएसएच