ये सरकार शिक्षा व्यवस्था को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं : टीकाराम जूली

जयपुर, 20 अगस्त . राजस्थान में विपक्ष के नेता टीकाराम जुली ने कांग्रेस विधायकों के साथ मिलकर गुरुवार को राज्य सरकार के उस आदेश के खिलाफ विधानसभा तक विरोध मार्च निकाल लिया, जिसमें उन्होंने मीडिया पर शिक्षा विभाग की कवरेज करने पर रोक लगा दी.

भजनलाल सरकार के आदेश के खिलाफ अब राज्य में मीडिया लोगों को यह नहीं बता पाएगी कि मौजूदा समय में स्कूल कितने जर्जर हो चुके हैं या शिक्षा प्रणाली कितनी बदहाल हो चुकी है. इसी फैसले के विरोध में टीकाराम जूली ने कांग्रेस के अन्य विधायकों के खिलाफ साथ मिलकर विधानसभा तक मार्च निकाला, जिसमें वरिष्ठ नेता सचिन पायलट भी शामिल हुए. इस दौरान दोनों नेताओं ने पत्रकारों से बातचीत भी की.

टीकाराम जूली ने कहा कि ये लोग हमें कब तक रोकेंगे. ये लोग हमें नहीं रोक पाएंगे. मैं खुद विधानसभा में इस बात का जिक्र करते हुए कहा था कि ये लोग हमें नहीं रोक पाएंगे. ये लोग बच्चों को रोकना चाहते हैं. ये लोग बच्चों की आवाज को दबाना चाहते हैं. हर घर में बच्चा है. आखिरकार आप कितने बच्चों को मोबाइल ले जाने से रोकेंगे. आप लोग कितने मीडिया वाले रोकने का काम करेंगे. हम सिर्फ एक ही बात जानते हैं कि आज राजीव गांधी की पुण्यतिथि है. उन्होंने नवोदय विद्यालय खुलवाए थे. आज नवोदय विद्यालय से पढ़े हुए बच्चे देश दुनिया में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं. इन लोगों ने एजुकेशन में एक भी काम किया हो, तो आप मुझे बताइए.

उन्होंने कहा कि हम आईटीई लेकर आए थे. ये लोग अब उसका भगतान तक नहीं कर रहे हैं. सर्व शिक्षा अभियान और समग्र शिक्षा अभियान हम लोगों ने शुरू करने का काम किया था. लेकिन, अफसोस की बात है कि इन लोगों ने उसे भी बंद करने का काम किया. यही नहीं, सीएसआर का पैसा आरएसएस को दिया जा रहा है. मेरा यह कहना है कि यह पैसा स्कूलों को दीजिए. अगर यह पैसा स्कूलों को दिया गया होता, तो आज की तारीख में स्कूलों की तस्वीर बदल गई होती.

टीकाराम जूली ने कहा कि इस सरकार ने सत्ता में आने से पहले वादा किया था कि हम पहले ही साल में सारे पद भर देंगे. अफसोस की बात है कि अभी तक सवा लाख पद रिक्त पड़े हुए हैं. स्थिति ऐसी हो गई कि 9 लाख बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं. 3768 स्कूल जर्जर हो चुके हैं, वहां स्टूडेंट पढ़ने के लिए नहीं जा सकते हैं. इन स्कूलों को 85 हजार क्लासरूम क्षतिग्रस्त हैं. स्कूल में कोई भी पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं है और मैं समझता हूं कि यह बहुत ही गंभीर स्थिति है. सरकार को इस दिशा में काम करना चाहिए. लेकिन, अफसोस की बात है कि इस दिशा में कोई काम नहीं किया जा रहा है. यह सभी भाजपा के पाप हैं और अब इन पापों को भरने के लिए बीजेपी की ओर से एक ढक्कन कानून लाया गया है. ऐसे ढक्कन कानून में अपनी जेब में लेकर चलता हूं. ये ढक्कन कानून अब चलने वाला नहीं है. इस ढक्कन कानून को राजस्थान के बच्चे और जनता उखाड़ फेंकने का काम कर रहे हैं. बीजेपी के पाप का घड़ा भर चुका है. अब यह फूटेगा, बल्कि ढंका नहीं जाएगा.

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक ट्रेलर है. अभी पूरी फिल्म बाकी है. हम राजस्थान के सभी स्कूलों में जाकर यहां के स्कूलों की जर्जर हालत के बारे में लोगों को बताएंगे. हम इन लोगों को बताएंगे कि मौजूदा समय में स्कूलों की हालत कैसी बनी हुई है. यह छुपाएंगे, लेकिन हम दिखाएंगे. ये लोग हिंदू मुस्लिम की बात करेंगे, लेकिन अब हम मुद्दों पर बात करेंगे और मुद्दों के साथ जनता के बीच में जाएंगे.

वहीं, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार को घेरा. उनके मुताबिक, यह सरकार शिक्षा व्यवस्था को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है. जिसका खामियाजा मौजूदा समय में स्टूडेंट को चुकाना पड़ रहा है. सरकार को बच्चों के बारे में सोचना चाहिए. स्कूलों की हालत को ठीक रखनी चाहिए. स्कूलों के इंफ्रस्ट्रक्चर को सुधारना चाहिए. लेकिन, सरकार इस दिशा में बिल्कुल भी गंभीर नहीं है. मानसून का सीजन आ चुका है. कई जगहों पर छत गिर रही है. सरकार अब चाहती है कि कोई भी पत्रकार वहां पर नहीं जाए. सरकार ऐसा करके अपनी गलतियों को छुपाने की कोशिश कर रही है. लेकिन, जनता सब देख रही है. सरकार को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी. इससे साफ जाहिर हो रहा है कि सरकार अब पूरी तरह से बैकफुट पर आ चुकी है. सरकार को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी. सदन चलेगा और सरकार को जवाब देना होगा.

उन्होंने कहा कि यह अफसोस की बात है कि जिन स्कूलों को हमने खोला था, उसे बंद किया जा रहा है. स्थिति ऐसी हो चुकी है कि बच्चे खुद सामने आकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि किसी स्कूल में मास्टर नहीं है, तो कहीं हालत इतने बदतर हो चुके हैं कि वहां पर पढ़ाई नहीं हो सकती है. यह सरकार शिक्षा को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है. सरकार इस जर्जर व्यवस्था को सुधारने के बजाय उसे छिपाने में लगी हुई है. सरकार बौखलाई हुई है. सरकार के पास न ही फंड है और न ही नियित है. अगर सरकार प्राथमिकता तय करे, तो जाहिर सी बात है कि सुधार हो सकता है.

एसएचके/पीएम