
नई दिल्ली, 1 सितंबर . राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मंगलवार को कहा कि उसने दिल्ली और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी किए हैं.
इसमें पिछले महीने चलती हुई खाली बस में 16 साल की लड़की के साथ कथित रेप की जांच की मांग की गई है. साथ ही, एनएचआरसी ने दावा किया कि कई राज्य सरकारों ने उसकी पिछली चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया था कि ऐसी गाड़ियां नियमों का उल्लंघन कर रही हैं.
एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो ने समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा, “दिल्ली में जो घटना सामने आई है, जिसमें चलती स्लीपर कोच बस में लगभग 47 किलोमीटर के सफर के दौरान एक लड़की के साथ रेप किया गया, वह अपने आप में इस अपराध की भयावहता को दिखाती है. हमने इस मामले में दिल्ली और उत्तर प्रदेश दोनों सरकारों को नोटिस जारी किए हैं. हमने घटना की जांच के आदेश दिए हैं और पीड़िता के पुनर्वास के लिए निर्देश दिए हैं.”
उन्होंने कहा कि एनएचआरसी पिछले एक साल से राज्य सरकारों को चेतावनी दे रहा है कि स्लीपर कोच बसें नियमों का उल्लंघन कर रही हैं.
उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कई राज्य सरकारों ने इस पर अभी तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया है, इसलिए हम फिर से सभी राज्य सरकारों से बात करने जा रहे हैं कि स्लीपर बसों में केबिन, पर्दे आदि यात्रियों की सुरक्षा में बाधा डालते हैं और इस पर ध्यान देने की जरूरत है.”
पुलिस के अनुसार, यह घटना 4 अगस्त को ग्रेटर नोएडा में परी चौक के पास हुई थी.
पीड़िता ने शिकायत में आरोप लगाया कि दो आरोपियों ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी. बाद में उन्होंने लड़की को दिल्ली में कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया. आरोपियों की पहचान ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप के तौर पर हुई है और उन्हें उसी दिन तिमारपुर के एक पार्किंग एरिया से गिरफ्तार कर लिया गया.
इस बीच, प्रियंक कानूनगो ने सजा के तौर पर धूप में खड़ा किए जाने के बाद 10 साल की बच्ची की मौत के मामले पर भी प्रतिक्रिया दी. एनएचआरसी के सदस्य ने ‘राइट टू एजुकेशन एक्ट’ की धारा 17 और ‘जुवेनाइल जस्टिस एक्ट’ की धारा 75 का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें स्कूलों में बच्चों को किसी भी तरह की शारीरिक या मानसिक सजा देने या परेशान करने पर सख्त रोक है. उन्होंने कहा, “यह घटना अपने आप में बहुत गंभीर है कि एक बच्ची को धूप में खड़ा किया गया, जिससे दुर्भाग्यवश उसकी मौत हो गई.”
कानूनगो ने आगे कहा, “इस मामले में हमने दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किए हैं, ताकि जिम्मेदार शिक्षकों और मैनेजमेंट के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सके और एक मिसाल कायम की जा सके, जो छात्रों के साथ होने वाले ऐसे क्रूर अत्याचारों को रोकने के लिए एक सबक बने.”
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एएसएच/डीकेपी