
लखनऊ, 2 सितंबर . नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के टोल प्लाजा पर फर्जी वसूली के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कार्रवाई की. लखनऊ जोनल ऑफिस की टीम ने बुधवार को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) 2002 की धारा 17 के तहत 14 ठिकानों पर तलाशी अभियान शुरू किया.
यह छापेमारी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, एनसीआर और कोलकाता में की जा रही है.
यह जांच 22 जनवरी 2025 को दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई है. ईडी के मुताबिक जांच में पता चला है कि टोल प्लाजा पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन का इस्तेमाल करके फर्जी टोल रसीदें बनाई जा रही थीं और इस पैसे को सरकारी अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर डायवर्ट किया जा रहा था.
एनएचएआई से मिले रिकॉर्ड और फॉरेंसिक जांच में भी ऐसे सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है. छापेमारी का मकसद डिजिटल और दस्तावेजी सबूत जुटाना, इसमें शामिल लोगों की पहचान करना और अपराध से कमाए गए पैसे का पता लगाना है. एजेंसी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है.
एक अन्य मामले में ईडी ने मंगलवार को मनी लॉन्ड्रिंग केस में करीब 3.31 करोड़ रुपए की चल संपत्ति अटैच की है. यह कार्रवाई अक्षता मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य से जुड़े केस में की गई है. इसमें एचडीएफसी बैलेंस्ड एडवांटेज फंड की 62,914.316 यूनिट्स को अटैच किया गया है.
बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने 1 सितंबर को पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत यह प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया था. यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच सीबीआई की एंटी करप्शन ब्यूरो, बेंगलुरु द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें अक्षता मिनरल्स, उसके डायरेक्टर्स और अन्य पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप है.
मंगलवार को ही ईडी ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पूर्व निजी सहायक केके चंद्रवंशी उर्फ केके चंद्राकर के घर पर भी छापेमारी की थी. यह तलाशी छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई.
सूत्रों के मुताबिक, ईडी के 5 से 8 अधिकारियों की टीम सुबह करीब 6 बजे दो गाड़ियों में दुर्ग जिले के पुराने भिलाई इलाके में स्थित चंद्रवंशी के घर पहुंची थी. अधिकारियों ने घर में दस्तावेजों की जांच की, जबकि बाहर सुरक्षा बल तैनात रहे.
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वीकेयू/एएस