तमिलनाडु विधानसभा सचिवालय एसाक्की सुबैया के इस्तीफा वापस लेने के अनुरोध पर देगा जवाब

चेन्नई, 2 सितंबर . तमिलनाडु विधानसभा सचिवालय बुधवार को अम्बासमुद्रम के पूर्व विधायक एसक्की सुबैया के इस्तीफा वापस लेने के अनुरोध पर जवाब दे सकता है. इससे राज्य में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद मची राजनीतिक हलचल में एक नया मोड़ आ गया है.

सुबया ने 28 अगस्त को विधानसभा सचिव शांति को एक पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने अनुरोध किया कि उनके द्वारा पहले दिए गए इस्तीफे पर कोई कार्रवाई न की जाए. उन्होंने कहा कि वह अंबासमुद्रम के चुने हुए प्रतिनिधि के तौर पर बने रहना चाहते हैं, हालांकि चुनाव आयोग ने इस निर्वाचन क्षेत्र को पहले ही रिक्त घोषित कर दिया है और आधिकारिक गजट में इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है.

यह घटनाक्रम विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद एआईडीएमके में हुई फूट के बाद सामने आया है. पार्टी के विधायकों के एक समूह ने पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के खिलाफ कदम उठाए और टीवीके को समर्थन दिया, जिसने एआईडीएमके को हराया और बाद में सरकार बनाई.

चूंकि शुरुआत में टीवेके के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था, इसलिए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पेश किया.

एआईडीएमके नेतृत्व के आदेश को न मानते हुए पार्टी के 25 विधायकों ने सरकार के समर्थन में वोट किया. इनमें धारापुरम के विधायक एस. सत्यभामा, अंबासमुद्रम के विधायक इसक्की सुबैया, मदुरंतकम के विधायक मरगथम कुमारवेल और पेरुंदुरई के विधायक जयकुमार शामिल थे.

बाद में इन चारों ने अचानक अपनी विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया और टीवीके में शामिल हो गए.

पलानीस्वामी ने स्पीकर जे.सी.टी. प्रभाकर के पास शिकायत दर्ज कराई और दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की. हालांकि, उनके इस्तीफे बिना किसी देरी के स्वीकार कर लिए गए, जिसके बाद चुनाव आयोग ने औपचारिक रूप से चारों सीटों को खाली घोषित कर दिया.

पलानीस्वामी ने इन चार पूर्व विधायकों के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट में भी मामला दायर किया है और यह मामला अभी विचाराधीन है.

इस बीच पार्टी के आदेश को न मानने वाले अन्य एआईडीएमके विधायकों ने कथित तौर पर अपने व्यवहार के लिए माफी मांगी.

पलानीस्वामी के अनुरोध पर स्पीकर ने उन्हें माफ कर दिया और कार्रवाई बंद कर दी. हालांकि, राहत पाने वाले विरलीमलाई के विधायक डॉ. सी. विजय और करूर के विधायक एम.आर. विजय ने अगले ही दिन इस्तीफा दे दिया और टीवीके में शामिल हो गए.

विधानसभा सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि सुबैया का हालिया अनुरोध कानूनी रूप से मान्य नहीं हो सकता है, क्योंकि उनका इस्तीफा पहले ही स्वीकार किया जा चुका है और सीट खाली होने की औपचारिक सूचना भी जारी हो चुकी है.

चुनाव कानून के तहत, खाली घोषित की गई सीट के लिए उपचुनाव कराना जरूरी है. उम्मीद है कि सचिवालय बुधवार को सुबैया को अपना औपचारिक जवाब भेजेगा. स्पीकर प्रभाकर मीडिया से बात कर सकते हैं और प्रस्तावित उपचुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले, पूर्व विधायक के अपनी सीट वापस पाने की कोशिश से जुड़े कानूनी और संवैधानिक पक्ष को स्पष्ट कर सकते हैं.

ओपी/एएस