बेल्जियम के पीएम बार्ट डी वेवर का भारत दौरा, द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई रणनीतिक उड़ान

नई दिल्ली, 2 सितंबर . बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर बुधवार से भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर रहेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा कई मायनों में अहम है. फरवरी 2025 में पद संभालने के बाद यह डी वेवर की पहली भारत यात्रा है और करीब दो दशक बाद किसी बेल्जियम प्रधानमंत्री का भारत दौरा हो रहा है.

भारत और बेल्जियम अपने पारंपरिक आर्थिक रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. व्यापार और निवेश के साथ रक्षा एवं सुरक्षा, तकनीक, नवाचार, बंदरगाह, समुद्री संपर्क, स्वच्छ ऊर्जा और लोगों के बीच संबंधों को इस यात्रा के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में देखा जा रहा है.

डी वेवर के साथ बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन के साथ अधिकारियों और उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधियों का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी होगा. इससे यात्रा के आर्थिक और रक्षा दोनों आयामों का महत्व स्पष्ट होता है.

भारत और बेल्जियम के संबंधों की जड़ें तीन शताब्दियों से अधिक पुरानी हैं. स्वतंत्र भारत के साथ सितंबर 1947 में राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले शुरुआती यूरोपीय देशों में बेल्जियम शामिल था.

आज दोनों देशों के रिश्तों का सबसे चर्चित पहलू हीरा कारोबार है. बेल्जियम का एंटवर्प दुनिया के प्रमुख हीरा व्यापार केंद्रों में है, जबकि भारत का सूरत हीरा कटिंग और पॉलिशिंग का वैश्विक केंद्र है. इस वजह से दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में हीरा उद्योग की विशेष भूमिका रही है.

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 2025-26 में भारत और बेल्जियम के बीच द्विपक्षीय व्यापार 13.01 अरब डॉलर तक पहुंच गया. वहीं अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 के बीच भारत में बेल्जियम से लगभग 4.2 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया.

मार्च 2025 में बेल्जियम की प्रिंसेस एस्ट्रिड के नेतृत्व में भारत आया बेल्जियन आर्थिक मिशन इस दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव था. इसमें कंपनियों, वाणिज्यिक संगठनों, अकादमिक संस्थानों और सार्वजनिक संस्थाओं से जुड़े 338 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

इस मिशन के दौरान 38 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए. इससे दोनों देशों के कारोबारी और निवेश संबंधों को नई गति मिली.

इसके बाद जुलाई 2026 में भारत-बेल्जियम संबंधों में एक और महत्वपूर्ण बदलाव आया, जब दोनों देशों ने पहली बार मंत्री स्तर का रणनीतिक संवाद शुरू किया. 15 जुलाई को ब्रसेल्स में हुई पहली भारत-बेल्जियम रणनीतिक वार्ता की सह-अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर और बेल्जियम के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मैक्सिम प्रेवो ने की.

यह नया तंत्र दोनों देशों को द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर नियमित रणनीतिक बातचीत का मंच देता है.

डी वेवर की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू रक्षा सहयोग है. बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रांकेन और बेल्जियम के रक्षा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों की मौजूदगी भारत और बेल्जियम के रक्षा औद्योगिक तंत्र के बीच सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने का अवसर देगी.

भारत-बेल्जियम संबंध लंबे समय तक मुख्यतः व्यापार और आर्थिक सहयोग तक केंद्रित रहे हैं, लेकिन अब रक्षा और सुरक्षा भी तेजी से महत्वपूर्ण आयाम बन रहे हैं. नई दिल्ली में बेल्जियम द्वारा रक्षा अताशे की नियुक्ति को भी इसी बदलती प्राथमिकता के संकेत के रूप में देखा जा सकता है.

आतंकवाद और चरमपंथ से मुकाबला भी दोनों देशों के सहयोग का अहम क्षेत्र है. 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ब्रसेल्स दौरा भी ऐसे समय हुआ था जब बेल्जियम हाल ही में हुए भीषण आतंकवादी हमलों से जूझ रहा था.

भारत-बेल्जियम सहयोग केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं है. विज्ञान, तकनीक और नवाचार भी तेजी से उभरते क्षेत्र हैं.

मार्च 2023 में उत्तराखंड के नैनीताल स्थित आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (एरिज) में दुनिया के सबसे बड़े लिक्विड मिरर टेलीस्कोप में से एक का उद्घाटन हुआ था. इसके निर्माण में बेल्जियम की अंतरिक्ष कंपनी एएमओएस की भूमिका रही.

स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण सहयोग सामने आया है. बेल्जियम की कंपनी जॉन कॉकरिल आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में दुनिया की बड़ी इलेक्ट्रोलाइजर उत्पादन सुविधाओं में से एक का निर्माण कर रही है, जिसकी प्रस्तावित क्षमता 2 गीगावॉट है.

यह सहयोग भारत की हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं तथा बेल्जियम की तकनीकी विशेषज्ञता के बीच संभावित तालमेल को दर्शाता है.

यूरोप के महत्वपूर्ण समुद्री और लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में बेल्जियम भारत के लिए एक स्वाभाविक साझेदार है.

भारत के बंदरगाहों और बेल्जियम के एंटवर्प बंदरगाह के बीच सहयोग भारतीय बंदरगाह अधिकारियों के प्रशिक्षण तक पहुंच चुका है. भविष्य में बंदरगाह प्रबंधन, शिपिंग, लॉजिस्टिक्स और वैश्विक सप्लाई चेन के क्षेत्र में सहयोग को और विस्तार दिया जा सकता है.

ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता और लचीलापन तलाश रहा है, भारत और यूरोप के बीच समुद्री संपर्क का महत्व और बढ़ गया है.

अपनी यात्रा के अंतिम दिन यानी 4 सितंबर को डी वेवर मुंबई भी जाएंगे. मुंबई यात्रा भारत-बेल्जियम संबंधों के आर्थिक पक्ष को रेखांकित करेगी. उनके भारत के प्रमुख हीरा व्यापार केंद्रों में से एक भारत डायमंड बोर्स जाने की योजना है.

यह दौरा प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है. एक ओर एंटवर्प वैश्विक हीरा कारोबार का प्रमुख केंद्र है, तो दूसरी ओर भारत, विशेष रूप से गुजरात का सूरत और मुंबई का हीरा व्यापार तंत्र, इस वैश्विक उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

इस क्षेत्र में तकनीक, व्यापार, प्रसंस्करण और वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जुड़े सहयोग की नई संभावनाएं तलाशना दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है.

भारत और बेल्जियम के बीच मजबूत होते रिश्तों का असर केवल द्विपक्षीय स्तर तक सीमित नहीं है. बेल्जियम यूरोपीय संघ के भीतर भारत के लिए महत्वपूर्ण साझेदार है. ऐसे में ब्रसेल्स और नई दिल्ली के बीच बढ़ता रणनीतिक संवाद भारत-ईयू संबंधों को भी नई गति दे सकता है.

बेल्जियम ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी का समर्थन किया है. यह वैश्विक शासन व्यवस्था में भारत की बड़ी भूमिका के प्रति बेल्जियम के समर्थन को दर्शाता है.

दोनों देशों के रिश्तों की एक और मजबूत कड़ी शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क है. बेल्जियम में इस समय करीब 1,131 भारतीय विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं. केयू ल्यूवेन, घेंट यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ एंटवर्प, हैसेल्ट विश्वविद्यालय और व्रीजे यूनिवर्सिटिट ब्रसेल्स जैसे संस्थानों के भारतीय विश्वविद्यालयों के साथ अकादमिक संबंध हैं.

करीब 35,000 भारतीय मूल के लोग बेल्जियम में रहते हैं और दोनों देशों के बीच सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पुल का काम करते हैं.

बेल्जियम में योग, भारतीय संगीत और नृत्य की भी अच्छी लोकप्रियता है. एंटवर्प में महात्मा गांधी की प्रतिमा और ल्यूवेन में रवींद्रनाथ टैगोर की प्रतिमा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक रिश्तों की प्रतीक हैं.

भारत-बेल्जियम संबंधों का एक भावनात्मक पक्ष प्रथम विश्व युद्ध की साझा विरासत भी है. फ्लैंडर्स के युद्धक्षेत्रों में 9,000 से अधिक भारतीय सैनिकों ने अपने प्राण न्योछावर किए थे.

यप्रेस के मेनिन गेट पर स्थित भारतीय स्मारक स्तंभ इन सैनिकों के बलिदान की याद दिलाता है.

बार्ट डी वेवर की भारत यात्रा के पीछे भारत और बेल्जियम के रिश्तों को एक नए ढांचे में ढालने की कोशिश दिखाई देती है.

एंटवर्प के हीरों से लेकर काकीनाडा के इलेक्ट्रोलाइजर, यूरोपीय बंदरगाहों से लेकर भारतीय रक्षा उद्योग और वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं तक भारत-बेल्जियम संबंध अब पारंपरिक आर्थिक साझेदारी से निकलकर रणनीतिक सहयोग के व्यापक क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं.

केआर/