
नई दिल्ली, 3 सितंबर . जितेंद्र मिश्र को अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ बनाए जाने को लेकर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है.
से बातचीत करते हुए कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, “सेलेक्शन की लंबी प्रक्रिया दिखाने की कोशिश की गई लेकिन सब इंटर्नल वर्किंग है. उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अच्छी भूमिका निभाई थी. वे एक बेहतरीन अधिकारी रहे हैं लेकिन एक मिश्रा गए तो दूसरे मिश्रा आ गए. इनसे और सेवाएं ली जा सकती हैं. अगर कोई प्रशासनिक बैकग्राउंड का शख्स होता तो बेहतर होता. उदित राज ने कहा कि हिंदू धर्म सबका है, लेकिन जब भागीदारी देने की बात आती है तो क्या ओबीसी, एससी-एसटी हिंदू नहीं रह जाते? किसी ओबीसी या एससी को भी बनाया जा सकता है क्योंकि यह प्रशासनिक पद है.
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि यह काम साधु-संतों का था. इन लोगों को कोई ईमानदार साधु-संत नहीं मिला, क्या? साधु-संतों से काम छीन लिया, इसी वजह से चढ़ावा चोरी हुई है. रामलला का काम तो वर्षों से चल रहा था. कल को उनको भी कह देंगे कि बेईमान हैं.
राजद नेता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि खबर सीईओ की नियुक्ति होना नहीं है, खबर है चोरी, जमीन का बंदरबांट, आस्था के नाम पर खिलवाड़. ये चीजें चिंताजनक हैं, बाकी सब बेईमानी है.
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों सनातनियों के आस्था का विषय है. सीईओ बनाया जाना तभी सार्थक होगा, जब राम मंदिर ट्रस्ट पूरी तरह से पारदर्शी हो और लोग अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें. यह जो घालमेल का मामला है, इससे सनातनी खुश नहीं हैं. भाजपा सरकार सनातनियों की आस्था के साथ खिलवाड़ करती है.
समाजवादी पार्टी से सलेमपुर सांसद रामाशंकर राजभर ने कहा कि जितेंद्र मिश्रा हमारे संसदीय क्षेत्र के भूपतपूरा गांव के रहने वाले हैं. उनको बड़ी चुनौती मिली है. उनका मैं स्वागत करता हूं. जिस प्रदेश में आईएएस और आईपीएस अधिकारी काम न कर पाएं, सरकार की ओर से उन पर दबाव बनाया जाए और उसकी वजह से अधिकारी का इस्तीफा हो रहा हो. ऐसे में उनके लिए यह बड़ी चुनौती है.
सपा नेता उदयवीर सिंह ने कहा कि सामाजिक रूप से सभी महत्वपूर्ण हैं. मूल मुद्दा जिम्मेदारी देने का नहीं है; मूल मुद्दा यह है कि जिन पर आरोप है, उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई. जब तक उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती या इस मामले में शामिल बड़े लोगों को चिह्नित नहीं किया जाता, तो ऐसी व्यवस्थाएं बदलना केवल लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश के रूप में देखा जाएगा. व्यवस्था परिवर्तन के साथ ही दोषी लोगों को भी सजा मिलनी चाहिए थी.
–आईपीएम एएनएस
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