राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ के तौर पर जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर एनडीए नेता बोले-‘ऑपरेशन सिंदूर संभाला था, पारदर्शिता लाएंगे’

नई दिल्ली, 3 सितंबर . राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के तौर पर एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (रिटायर्ड) की नियुक्ति का भाजपा ने गुरुवार को स्वागत किया जबकि विपक्ष के कुछ नेताओं ने पारदर्शिता, जवाबदेही और कथित अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई.

भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने मिश्रा को उनकी नियुक्ति पर बधाई दी और कहा कि उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अहम भूमिका निभाई थी और भारत को जीत दिलाई थी.

उन्होंने समाचार एजेंसी से ​​कहा, “जितेंद्र मिश्रा को बधाई. जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर का नेतृत्व किया और भारत को जीत दिलाई. हमें उम्मीद है कि वह इस नई जिम्मेदारी को भी उसी तरह संभालेंगे और यहां पारदर्शिता भी लाएंगे.”

भाजपा विधायक राम कदम ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदू भक्तों और भगवान राम के मानने वालों के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र है. उन्होंने कहा कि यह मंदिर 500 साल के संघर्ष और इंतज़ार के सफल समापन का प्रतीक है.

कदम ने कहा, “राम मंदिर करोड़ों हिंदू भक्तों और भगवान राम के मानने वालों के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र है. यह 500 साल के संघर्ष और इंतजार के सफल समापन का प्रतीक है. सीईओ पद के लिए 6,000 से ज्यादा आवेदन मिले थे और चयन प्रक्रिया में ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जिसमें हिंदू धर्म में आस्था और देशभक्ति का मेल हो. जिन्हें नियुक्त किया गया है, उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अहम भूमिका निभाई थी.”

भाजपा सांसद संतोष पांडे ने कहा, “निश्चित रूप से, हमें गर्व है कि ऐसे देशभक्त और ईमानदार व्यक्ति को नियुक्त किया गया है, जिन्होंने अपनी जिंदगी के 43 साल मातृभूमि की सेवा में समर्पित किए. पूरी लगन के साथ उन्होंने सेना का मनोबल बढ़ाया और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. यह एक सफल ऑपरेशन था और दुनिया भर में इसकी तारीफ हुई थी.”

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वायत्त और स्वतंत्र संस्था है और नियुक्तियों के संबंध में इसके अपने नियम हैं.

पासवान ने कहा, “यह एक ट्रस्ट है और ट्रस्ट के अपने नियम होते हैं. यह एक स्वायत्त और स्वतंत्र संस्था है और ट्रस्ट में किसी भी व्यक्ति को नियुक्त किया जा सकता है. मुझे याद है कि बिहार के स्वर्गीय कामेश्वर चौपाल भी उस ट्रस्ट का हिस्सा थे.”

पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि जितेंद्र मिश्रा राम मंदिर के भव्य निर्माण की देखरेख करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि काम ठीक से हो.

भट्टाचार्य ने कहा, “जितेंद्र मिश्रा देश के सामने राम मंदिर के भव्य निर्माण कार्य को पेश कर रहे हैं और इसकी ठीक से देखरेख करेंगे.”

छत्तीसगढ़ के मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मिश्रा की नियुक्ति को एक बड़ा संयोग और सौभाग्य बताया. उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से उनके जुड़ाव और एक काबिल अधिकारी के तौर पर उनकी अहमियत का जिक्र किया.

जायसवाल ने कहा, “देखिए, हम सभी के लिए यह बड़े संयोग और सौभाग्य की बात है कि रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, जो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी हिस्सा थे और इतने काबिल व्यक्ति हैं, उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट का सीईओ नियुक्त किया जा रहा है. वे न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक अहम हस्ती हैं.” मिश्रा की नियुक्ति से यह पक्का करने में मदद मिलेगी कि अतीत में हुई घटनाएं दोबारा न हों.

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि अतीत में हुई घटनाओं को देखते हुए, कोई ऐसी घटनाओं के दोबारा होने के बारे में सोच भी नहीं पाएगा.”

उत्तर प्रदेश के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा, “मुझे लगता है कि ट्रस्ट का जीतेंद्र मिश्रा को सीईओ नियुक्त करने का फैसला बेहतर है. क्योंकि जिस व्यक्ति ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अहम भूमिका निभाई है, वह निश्चित रूप से देशभक्त और राष्ट्रवादी है और देश के लिए काम करने वाला व्यक्ति है. इसलिए, मेरी नज़र में ऐसे व्यक्ति को कमान सौंपना एक बेहतर फ़ैसला है.”

जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने भी इस नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा कि गड़बड़ियों की रिपोर्ट मिलने पर अधिकारियों को बदलना किसी संस्थान के कामकाज को बेहतर बनाने की दिशा में एक कदम हो सकता है.

रजक ने कहा, “जब गड़बड़ियां होती हैं, तो लोगों को हटाया जाता है और बेहतरी के लिए नए लोगों को लाया जाता है. इसलिए, एक नया सीईओ नियुक्त किया गया है. वे एक ईमानदार अधिकारी हैं जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भूमिका निभाई थी. इस काबिलियत वाले सैन्य अधिकारी को सीईओ बनाया गया है; यह एक अच्छा कदम है. इसकी सराहना की जानी चाहिए और हर चीज पर कड़ी नजर रखी जानी चाहिए.”

भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि मिश्रा ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अच्छा काम किया था, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि नई भूमिका की जिम्मेदारियां अलग होंगी. उन्होंने कहा, “जैसा कि कहा गया है, उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान काम किया और अच्छा काम किया. लेकिन यहां हालात अलग हैं. यहां छिपे हुए दुश्मन हैं, इसलिए थोड़ी सावधानी बरतनी होगी.”

समाजवादी पार्टी के सांसद रमाशंकर राजभर ने मिश्रा की नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा कि पूर्व एयर मार्शल भटपार रानी विधानसभा क्षेत्र के भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं, जो उनके संसदीय क्षेत्र में आता है.

राजभर ने कहा, जितेंद्र मिश्रा मेरे संसदीय क्षेत्र के भटपार रानी विधानसभा क्षेत्र के भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं और उन्हें एक बड़ी चुनौती सौंपी गई है. मैं उनका स्वागत करता हूं.”

हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अधिकारियों पर सरकार का दबाव होता है और कहा कि इससे सीईओ की नई जिम्मेदारी और भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगी.

उन्होंने कहा, “ऐसे राज्य में जहां आईएएस और आईपीएस अधिकारी आजादी से काम नहीं कर पाते, सरकार उन पर दबाव डालती है और उस दबाव के कारण अधिकारी इस्तीफा दे रहे हैं; यह सीईओ के लिए एक बड़ी चुनौती है.”

राजभर ने राम मंदिर से जुड़ी अनियमितताओं पर भी चिंता जताई और कहा कि अयोध्या में भक्तों और संतों ने चिंताएं उठाई हैं, खासकर चढ़ावे की कथित चोरी और महीनों तक घटनाओं को दबाए रखने की बातों को लेकर.

उन्होंने कहा, “देश भर के करोड़ों हिंदुओं और अयोध्या के सभी संतों और साधुओं ने, जो भगवान राम को मानते हैं, चिंताएं जताई हैं, यूपी सरकार ने एक एसआईटी बनाई थी और एक राष्ट्रीय स्तर पर भी बनाई गई थी.” उन्होंने उम्मीद जताई कि मिश्रा मंदिर के फंड की रक्षा करेंगे और स्वतंत्र रूप से काम करेंगे.

राजभर ने कहा, “अब जब वह सीईओ बन गए हैं, तो मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं. वह भगवान राम की सेवा करें और राम के फंड की रक्षा करें ताकि कोई उन्हें लूट न सके. वह इस चुनौती का सामना तभी कर सकते हैं जब वह सत्ता में बैठे लोगों के दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दें. अधिकारियों पर जो दबाव है, उसे हटाकर ही कोई सच में भगवान राम की सेवा कर सकता है, जो धर्म के प्रतीक हैं.”

इस बीच, कांग्रेस विधायक नाना पटोले ने इस नियुक्ति की आलोचना की और आरोप लगाया कि संतों ने राम मंदिर के कामकाज के तरीके पर आपत्ति जताई है.

पटोले ने कहा, “संतों का कहना है कि यह काम संतों का है. कुछ संत तो इसे राम मंदिर मानने को भी तैयार नहीं हैं; संतों का कहना है कि यह भाजपा और आरएसएस के लिए लूट का अड्डा बन गया है.”

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह संतों और धर्म का सम्मान करे, साथ ही उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर राम मंदिर में लोगों की आस्था का फायदा उठाने का आरोप भी लगाया.

उन्होंने आगे कहा, “इसलिए, संतों और धर्म का सम्मान करना सरकार की जिम्मेदारी है. लेकिन आरएसएस और भाजपा सिर्फ राम मंदिर में लोगों की आस्था का फायदा उठाकर उनके पैसे लूटना चाहते हैं, और सरकार उन्हें बचा रही है.”

एएसएच/पीएम