
कोझिकोड, 4 सितंबर . केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने शुक्रवार को शासन से जुड़े नियमित कार्यों को कुछ समय के लिए अलग रखते हुए भारतीय प्रबंधन संस्थान, कोझिकोड (आईआईएमके) में आयोजित दो दिवसीय रणनीतिक नेतृत्व कार्यशाला में भाग लिया. इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्य की दीर्घकालिक विकास प्राथमिकताओं को नए सिरे से परिभाषित करना और भविष्य की विकास रणनीति तय करना है.
रीइमैजिनिंग केरलम नाम के इस कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य के अगले एक दशक को आकार देने वाली चुनौतियों और अवसरों पर सामूहिक चिंतन और नीतिगत मंथन के लिए एक मंच उपलब्ध कराना है. भारतीय प्रबंधन संस्थान कोझिकोड के मैनेजमेंट डेवलपमेंट सेंटर में आयोजित कार्यशाला शनिवार को संपन्न होगी.
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को पारंपरिक दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया. इस कार्यशाला में मंत्रिपरिषद के सदस्यों के अलावा राज्य के मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के सचिव, विशेष कार्याधिकारी और राज्य प्रोटोकॉल अधिकारी भी भाग ले रहे हैं. यह पहल पारंपरिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अलग है. इसका उद्देश्य केवल प्रशासनिक कौशल विकसित करना नहीं, बल्कि राज्य के दीर्घकालिक विकास, नीति निर्माण और भविष्य की रणनीतिक दिशा पर व्यापक विचार-विमर्श करना है.
प्रशासन की तुरंत की जरूरतों पर ध्यान देने के बजाय, इन सेशन में पॉलिसी बनाने वालों को शिक्षाविदों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ आमने-सामने लाया जाता है, ताकि लंबी अवधि की चुनौतियों की जांच की जा सके और यह पता लगाया जा सके कि पॉलिसी के फैसलों से लोगों की जिंदगी में स्थायी बदलाव कैसे लाए जा सकते हैं.
पहले दिन की चर्चा केरल के सामने आने वाले कुछ सबसे बड़े बदलावों- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), बढ़ती उम्र वाली आबादी, जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, रोजगार और अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप पर केंद्रित रही.
चर्चा के मुख्य विषयों में से एक केरल को हेल्थ और वेलनेस हब के तौर पर स्थापित करने की संभावना है. साथ ही सरकार तेजी से बढ़ती उम्र वाली आबादी के आर्थिक और सामाजिक नतीजों से निपटने के लिए एक खास ‘सिल्वर इकोनॉमी मिशन’ के विचार पर भी गौर करेगी.
चर्चाओं में रोजगार, उद्यमिता, कौशल विकास, उच्च शिक्षा, वित्तीय और आर्थिक क्षेत्र, पलायन और विदेशों से आने वाली रकम (रेमिटेंस) और केरलम की ग्लोबल ब्रांडिंग जैसे विषय भी शामिल होंगे.
आईआईएमके के डायरेक्टर प्रो. देबाशीष चटर्जी ने एआई के दौर में परिवर्तनकारी नेतृत्व, लोगों को मकसद और असर के साथ जोड़ना विषय पर एक सेशन के साथ प्रोग्राम की शुरुआत की.
नारायण हेल्थ के संस्थापक डॉ. देवी शेट्टी सार्वजनिक स्वास्थ्य के भविष्य पर एक सेशन में हिस्सा लेंगे. जापान की केइओ यूनिवर्सिटी के प्रो. राजीव शॉ और किंग्स कॉलेज लंदन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संचयन बनर्जी भी हिस्सा लेने वाले अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों में शामिल हैं.
एक तरफ जहा राज्य ज्ञान-आधारित और टेक्नोलॉजी-सक्षम अर्थव्यवस्था बनाना चाहता है, वहीं उसे साथ ही बढ़ती उम्र वाली आबादी, जलवायु से जुड़े जोखिमों, पलायन के बदलते पैटर्न और रेमिटेंस तथा बढ़ते वित्तीय दबावों से भी निपटना होगा. इसलिए इस वर्कशॉप का मकसद सिर्फ अलग-अलग स्कीमों और तुरंत लिए जाने वाले पॉलिसी फैसलों से आगे बढ़कर, इस बड़े सवाल पर विचार करना है कि आने वाले सालों में केरल कैसा होना चाहिए.
संभावित पॉलिसी उपायों की पहचान करने के लिए ग्लोबल अनुभवों और सबूतों पर आधारित तरीकों का इस्तेमाल किए जाने की उम्मीद है.
‘रीइमैजिनिंग केरलम’ पहल से ऐसे आइडिया और पॉलिसी दिशा-निर्देश मिलने की उम्मीद है, जो सरकार को सिर्फ तुरंत की प्रशासनिक चुनौतियों के बजाय संरचनात्मक बदलावों से निपटने में मदद कर सकें.
इससे भी जरूरी बात यह है कि यह कैबिनेट और सीनियर अफसरशाही को केरल के विकास के अगले चरण के लिए एक साझा और लंबे समय का नजरिया विकसित करने का मौका देता है.
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डीकेएम/वीसी