एसआरसीसी शताब्दी समारोह में पीएम मोदी का भाषण छात्रों को आया पसंद, बोले- जिम्मेदारी का अहसास हुआ

नई दिल्ली, 6 सितंबर . दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन को छात्रों ने प्रेरणादायक और यादगार बताया. छात्रों ने प्रधानमंत्री के भाषण में भारत की आर्थिक प्रगति, विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा क्षेत्र, फिनटेक, मेक इन इंडिया और देश की भविष्य की संभावनाओं से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किए जाने की सराहना की.

छात्रा धनिष्ठा ने कहा कि प्रधानमंत्री का एसआरसीसी परिसर में होना सम्मान की बात थी. उनके शब्दों ने छात्रों को प्रेरित किया और यह पूरे एसआरसीसी परिवार के लिए गर्व का क्षण था. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जब पहले कॉलेज आए थे तब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और अब प्रधानमंत्री के रूप में आए हैं. इस दौरान भारत और उसकी अर्थव्यवस्था में काफी बदलाव और सुधार देखने को मिला है.

आरुषि ने प्रधानमंत्री के संबोधन को ‘अमेजिंग’ और प्रेरणादायक अनुभव बताया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था के पुराने और मौजूदा दौर की तुलना जिस तरह समझाई, उससे नई पीढ़ी को आगे निर्माण करने की प्रेरणा मिली. एसआरसीसी के छात्र सरकार के सहयोग से देश को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाने का प्रयास करेंगे.

स्वांतिका ने कहा कि एसआरसीसी के शताब्दी वर्ष में प्रधानमंत्री का परिसर में आना विशेष अवसर था. उन्होंने प्रधानमंत्री के मंच पर आने, बैठने और संबोधन के तरीके को यादगार बताया. पीएम ने 2013 के अपने विजन का भी उल्लेख किया और यह बताया कि देश को आगे किस दिशा में बढ़ाना है. यह संबोधन लंबे समय तक याद रहेगा.

निष्ठा ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा अवसर मिलेगा. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने छात्रों को देश का भविष्य बताते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. इससे युवाओं के भीतर देश के लिए कुछ करने की जिम्मेदारी का अहसास भी होता है.

पहले वर्ष के छात्र युग ने कहा कि प्रधानमंत्री का एसआरसीसी आना उनके लिए शानदार अनुभव रहा. उन्होंने खास तौर पर प्रधानमंत्री द्वारा जेनजी से जुड़े शब्दों और स्लैंग का इस्तेमाल किए जाने को सराहा. युग के मुताबिक, ‘ओजी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने से छात्रों को लगा कि प्रधानमंत्री उनसे उनकी भाषा में जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

अनन्या ने भी प्रधानमंत्री के जेनजी से जुड़े शब्दों के इस्तेमाल को पसंद किया. उन्होंने कहा कि पहली बार उन्हें प्रधानमंत्री को इतने करीब से देखने और सुनने का अवसर मिला. उनका संबोधन प्रभावशाली था और छात्रों के बीच प्रधानमंत्री की शैली को लेकर उत्साह दिखाई दिया.

रचित ने कहा कि प्रधानमंत्री को सामने से देखना उनके लिए पहली बार का अनुभव था. उन्होंने प्रधानमंत्री के आत्मविश्वासपूर्ण संबोधन की सराहना की. रचित के मुताबिक, भाषण में 2013 से पहले और बाद के भारत की तुलना, ‘मेक इन इंडिया’ और विकास योजनाओं का उल्लेख किया गया. उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े प्रधानमंत्री के बयानों का भी जिक्र किया.

आर्या जैन ने कहा कि प्रधानमंत्री का भाषण उनके लिए उत्साह से भरा अनुभव था. उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा विभिन्न आंकड़ों और डेटा का इस्तेमाल किए जाने को रोचक बताया. आर्या के मुताबिक, भाषण में 2013 से पहले के भारत और उसके बाद हुए विकास की चर्चा की गई. उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि भारत फिलहाल एक अच्छी स्थिति में है.

अंशिका भाटिया ने प्रधानमंत्री द्वारा ‘आधा गिलास’ वाली पुरानी धारणा को नए नजरिए से समझाने की बात को खास तौर पर सराहा. उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री ने कहा कि गिलास को केवल आधा खाली या आधा भरा देखने के बजाय उसमें मौजूद पानी के साथ हवा को भी देखा जाना चाहिए. अंशिका ने इसे एक अलग दृष्टिकोण बताया.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का जेनजी स्लैंग का इस्तेमाल छात्रों को पसंद आया और इससे माहौल हल्का-फुल्का भी रहा. हालांकि, अंशिका ने यह भी कहा कि विकास के बावजूद कुछ क्षेत्रों में और सुधार की गुंजाइश है और सरकार को उन क्षेत्रों पर भी ध्यान देना चाहिए.

पीयूष गौड़ ने भी ‘आधा गिलास’ वाले उदाहरण को भाषण की खास बात बताया. उन्होंने इसे विज्ञान और संसाधनों के बेहतर उपयोग से जोड़ते हुए कहा कि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल देश की प्रगति में मदद कर सकता है. छात्रा सिमरन ने कहा कि प्रधानमंत्री को सुनना अपने आप में बड़ा अवसर है और इतनी कम उम्र में ऐसा अनुभव मिलना उनके लिए खास रहा. उन्होंने प्रधानमंत्री के भाषण में आंकड़ों के इस्तेमाल को विशेष रूप से सराहा.

पीएसके/एबीएम