
नई दिल्ली, 6 सितंबर . दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक चार मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई. इमारत में पेइंग गेस्ट (पीजी) चल रहा था, जिसमें कई छात्र रह रहे थे. हादसे के बाद कई छात्र मलबे के नीचे फंस गए. दिल्ली फायर सर्विस (डीएफसी) के मुताबिक अब तक 4 लोगों को मलबे से निकाला गया है और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है. कांग्रेस ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है.
कांग्रेस ने इस घटना पर दुख जताया है. कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में इमारत गिरने की खबर बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. खबरों के मुताबिक, इस इमारत में ज्यादातर डीयू के छात्र रहते थे, जिनके मलबे में दबे होने की जानकारी मिल रही है.
कांग्रेस ने कहा कि घटना के तुरंत बाद से नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के साथी मौके पर हर संभव मदद करने में जुटे हैं. सरकार से अपील है कि युद्धस्तर पर राहत बचाव कार्य चलाएं, मलबे में दबे छात्रों और लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकाला जाए.
वहीं, कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने मोती बाग स्थित सत्य निकेतन में शिव मंदिर के पास इमारत गिरने की घटना को एक दर्दनाक घटना बताया है. उन्होंने कहा कि इससे पहले भी इसी गली में इसी तरह की घटना घटी थी और पुष्टि की कि तीन बच्चों को बचा लिया गया है. यहां पर चल रहे पीजी और हॉस्टलों की हालात पूरी तरह से जर्जर हैं. ऐसे में कौन इनका नक्शा पास कर रहा है, कौन इनको फायर डिमापर्टमेंट की एनओसी दे रही है, एमसीडी और एनडीएमसी की क्या भूमिका है, दिल्ली सरकार और यहां के जनप्रतिनिधियों की क्या जवाबदेही है, इसका कहीं कोई जिक्र नहीं है. यह बहुत दर्दनाक घटना है.
दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि यहां पुलिस और एंबुलेंस बहुत देर से आई हैं. यह पहली घटना नहीं है. साकेत में भी बच्चों ने अपनी जान गवाई थी. ये पीजी जो चल रहे हैं उनका कोई मापदंड नहीं है. हम सभी ने कहा था कि इनकी जांच करनी चाहिए. आज हम सभी के लिए दुख का समय है. यह राजनीति का नहीं बल्कि बचाव का समय है. फायर और बिल्डिंग सेफ्टी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. दिल्ली में हर साल इस प्रकार की घटना घट रही है. अब और कितने छात्रों की जान जाएगी? सरकार को जवाब देना होगा.
स्थानीय लोगों के मुताबिक हादसा सुबह 11:30 से 11:45 बजे के बीच हुआ. एक स्थानीय निवासी ने कहा, “अंदर कई छात्र फंसे हैं, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं.” एक अन्य ने करीब 20 से 30 लोगों के अंदर फंसे होने की आशंका जताई है.
एक छात्रा आस्था कुमारी ने से बात करते हुए कहा, “हमें इमारत गिरने की बहुत तेज आवाज आई, उसके बाद एंबुलेंस की आवाज आने लगी. फिर हमने घायलों को लेकर जाते बचावकर्मियों को देखा. हम आशा करते हैं कि सभी ठीक हों. इमारत में पीजी चल रही थी, मैं यहां खुद पीजी में रहती हूं. प्रशासन की कोई व्यवस्था नहीं है. अगर लोगों को बच्चों की टेंशन होती, पीजी के बाहर बोर्ड क्यों नहीं है? सत्य निकेतन छात्रों का हब है.”
उन्होंने कहा, “स्टूडेंट हॉस्टल होता है; उसमें बच्चों के निकलने के लिए कम से कम दो एग्जिट गेट होते हैं, लेकिन यहां पर ऐसा कुछ नहीं है. छोटे से एरिया में इतनी ऊंची इमारत खड़ी होती है, यह कैसे संभव है.”
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एमएस/