मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों पर पुलिस की कार्रवाई की जांच के आदेश दिए

भोपाल, 8 सितंबर . मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को भोपाल में स्टाइपेंड (भत्ते) को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों पर कथित लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल की जांच के आदेश दिए.

यह घटनाक्रम राज्य भर में इंटर्न डॉक्टरों के बढ़ते विरोध के बीच हुआ है, जिसके कारण सरकारी अस्पतालों में सामान्य ओपीडी (ओपीडी) सेवाएं बंद हैं, हालांकि इमरजेंसी सेवाएं चालू हैं.

इस खबर की पुष्टि करते हुए डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने को बताया कि डॉक्टरों ने सोमवार को हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की थी और उन्होंने इस मामले पर भोपाल के पुलिस कमिश्नर संजय कुमार से बात की है.

डिप्टी सीएम शुक्ला ने कहा कि डॉक्टर निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के लिए सजा चाहते थे. मैंने पुलिस कमिश्नर से बात की और जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं. डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) जांच करेंगे और मुख्यमंत्री (मोहन यादव) के लौटने से पहले रिपोर्ट पेश कर दी जाएगी.

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने डॉक्टरों के साथ गलत व्यवहार किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

स्टाइपेंड के मुद्दे पर डिप्टी सीएम शुक्ला ने कहा कि इस मामले को सुलझाने के लिए इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बातचीत चल रही है.

पुलिस की यह कार्रवाई सोमवार को तब हुई जब प्रदर्शनकारी इंटर्न डॉक्टर अपने स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवास की ओर मार्च कर रहे थे.

डॉक्टरों का आरोप है कि उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया.

इस घटना के बाद से प्रदर्शनकारी डॉक्टरों और राज्य सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है, जबकि इस मुद्दे को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिशें भी जारी हैं.

भोपाल में, इंटर्न ने कमला पार्क में रात भर अपना धरना जारी रखा.

मुख्यमंत्री आवास के आस-पास सुरक्षा बढ़ा दी गई और वहां जाने वाली सड़कों पर बैरिकेड लगा दिए गए.

इस विरोध-प्रदर्शन का असर हमीदिया अस्पताल की सेवाओं पर भी पड़ा, जहां मंगलवार को रूटीनस ओपीडी बंद रहीं.

अस्पताल में मरीज और उनके साथ आए लोग इंतजार करते दिखे. कई लोगों को डॉक्टर से सलाह लेने और जांच करवाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा.

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जेडीए) ने कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर इंटर्न का समर्थन किया है.

डॉक्टर स्टाइपेंड में तुरंत बढ़ोतरी और कथित तौर पर बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन कविता सिंह ने भी वॉटर कैनन के इस्तेमाल पर सवाल उठाए.

उन्होंने कहा कि वॉटर कैनन का इस्तेमाल गलत था. मुझे भी यह बात पसंद नहीं आई.

एमएस/